



एलडीसी भर्ती-2013 एक बार फिर विवादों में आ गई है। इस बार मामला भर्ती प्रक्रिया के दौरान विभिन्न छूटों और न्यायालयीन आदेशों के आधार पर बाद में नियुक्त हुए कर्मचारियों को वर्ष 2013 से ही नोशनल एवं वित्तीय लाभ देने का है। पंचायती राज विभाग की जांच में सामने आया है कि वर्ष 2013 से 2022 के बीच नियुक्त हुए करीब 3,000 कर्मचारियों को नियमों के विपरीत एरियर और अन्य वित्तीय लाभ दिए गए, जिससे राज्य सरकार पर लगभग 100 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ा। अब इस राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
एलडीसी भर्ती-2013 के तहत 19,215 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। इनमें से लगभग 7,400 अभ्यर्थियों को उसी वर्ष नियुक्ति मिल गई थी। बाद के वर्षों में न्यायालयों के आदेश, विभागीय निर्णयों और भर्ती नियमों में दी गई छूट के आधार पर अन्य अभ्यर्थियों को भी नियुक्तियां दी गईं। हालांकि कई मामलों में कर्मचारियों को उनकी वास्तविक नियुक्ति तिथि के बजाय वर्ष 2013 से ही नोशनल लाभ और एरियर प्रदान कर दिया गया।
पंचायती राज विभाग की समीक्षा में पाया गया कि बाद में नियुक्त कर्मचारियों को पूर्व प्रभाव से वित्तीय लाभ देना नियमों के अनुरूप नहीं था। इसके बाद विभाग ने सभी जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) और विकास अधिकारियों को ऐसे मामलों की पहचान कर अतिरिक्त भुगतान की गई राशि की वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।
जांच के दौरान कुछ जिलों, विशेष रूप से अलवर में, ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहां संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों को नियमित नियुक्ति मिलने के बाद वर्ष 2013 से एलडीसी वेतन का एरियर भी दे दिया गया। यानी संबंधित कर्मचारी एक ओर संविदा मानदेय प्राप्त करते रहे और दूसरी ओर उसी अवधि का नियमित वेतन भी प्राप्त कर लिया।
पंचायती राज विभाग के संयुक्त सचिव जसवंत सिंह द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि अलग-अलग समय पर नियुक्त किए गए कर्मचारियों को वर्ष 2013 से नोशनल परिलाभ देना नियमसम्मत नहीं है। विभागीय समिति द्वारा लिए गए निर्णयों के अनुसार सभी जिला परिषदों को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।
भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें बाद में नियुक्ति मिलने के बावजूद कर्मचारियों को 2013 से लाभ दे दिया गया। इनमें चयन सूची में आने के बाद समय पर जॉइन नहीं करने वाले अभ्यर्थी, प्लेसमेंट एजेंसियों और जलग्रहण समितियों से जुड़े कार्मिक, एनआरएचएम और सर्व शिक्षा अभियान से जुड़े अभ्यर्थी तथा शैक्षणिक योग्यता में छूट प्राप्त उम्मीदवार शामिल हैं।
इसके अलावा दस्तावेज सत्यापन में अनुपस्थित रहने वाले अभ्यर्थियों को वर्ष 2018 में पुनः अवसर देकर नियुक्ति दी गई और उन्हें भी वर्ष 2013 से लाभ प्रदान किए गए। कंप्यूटर साइंस एवं कंप्यूटर एप्लीकेशन की डिग्रियों को आरएससीआईटी के समकक्ष मान्यता मिलने के बाद नियुक्त हुए अभ्यर्थियों तथा वर्ष 2022 में मंत्रिमंडल की स्वीकृति से नियुक्त लगभग 4 हजार अभ्यर्थियों को भी पूर्व प्रभाव से लाभ दिए जाने के मामले जांच के दायरे में हैं।
विभाग द्वारा जारी निर्देशों के बाद अब संबंधित कर्मचारियों से अतिरिक्त भुगतान की गई राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हालांकि इस निर्णय को लेकर कानूनी विवाद की संभावना भी जताई जा रही है, क्योंकि बड़ी संख्या में कर्मचारी वर्षों से इन लाभों का उपयोग कर चुके हैं।