



सभा में गौवंश संरक्षण को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए संत समाज ने सरकार से प्रभावी और कठोर कदम उठाने की मांग की। सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में पूरे देश में गौ हत्या पर तत्काल रोक लगाने, कत्लखानों को बंद करने तथा गौमांस के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि गौसंरक्षण केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
धर्मसभा में उपस्थित संतों और श्रद्धालुओं ने चेतावनी दी कि यदि गौवंश पर हो रहे अत्याचार नहीं रुके तो संत समाज और सनातन धर्मावलंबी व्यापक जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। इस संबंध में प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन तैयार किया गया, जिसे जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय भेजने का निर्णय लिया गया। ज्ञापन पर बड़ी संख्या में संतों और श्रद्धालुओं ने हस्ताक्षर किए।
कार्यक्रम में साध्वी अनादि सरस्वती, श्याम सुंदर शरण देवाचार्य, संत संजय दास भक्तमाल, रामकृष्ण देव महाराज सहित अनेक संत-महात्माओं ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने सनातन धर्म, साधु-संतों की सुरक्षा, मंदिरों और मठों की संपत्तियों की सुरक्षा तथा धार्मिक परंपराओं के संरक्षण पर भी जोर दिया।
धर्मसभा में अजमेर, पुष्कर, किशनगढ़, विजयनगर, नसीराबाद और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम में डॉ. कुलदीप शर्मा, देवेंद्र त्रिपाठी, पूर्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह, अरविंद पारीक, बृजेश गौड़, राजकुमार चौरसिया, चंद्रशेखर गौड़, तरुण वर्मा, लेखराज सिंह, एडवोकेट विजय शर्मा, एडवोकेट भगवान सिंह चौहान सहित अनेक सामाजिक और धार्मिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रभात फेरी के संचालक आलोक माहेश्वरी द्वारा भजनों की प्रस्तुति से हुई। अंत में संतों ने समाज में धार्मिक जागरूकता, गौसेवा और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।