Tuesday, 16 June 2026

टीएमसी के बागी सांसदों ने लोकसभा में अलग समूह की मान्यता मांगी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद करेंगे फैसला


टीएमसी के बागी सांसदों ने लोकसभा में अलग समूह की मान्यता मांगी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद करेंगे फैसला

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तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी राजनीतिक संकट के बीच बागी सांसदों ने लोकसभा में अलग समूह के रूप में मान्यता दिए जाने की मांग की है। इस संबंध में बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को ज्ञापन सौंपकर अलग बैठने की व्यवस्था और अपने नए राजनीतिक समूह की मान्यता का अनुरोध किया है।

सूत्रों के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मामले पर अंतिम निर्णय लेने से पहले दोनों पक्षों को सुनने का फैसला किया है। स्पीकर कार्यालय ने टीएमसी नेतृत्व से जुड़े सांसदों को भी बैठक के लिए आमंत्रित किया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही इस मामले पर निर्णय लिया जाएगा। माना जा रहा है कि संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले इस संबंध में फैसला आ सकता है।

जानकारी के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का कार्यालय इस मामले में कानूनी पहलुओं की भी समीक्षा कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर कानून मंत्रालय की राय भी ली जा सकती है, ताकि भविष्य में किसी न्यायिक चुनौती की स्थिति में निर्णय कानूनी कसौटी पर खरा उतर सके।

रविवार को टीएमसी के बागी सांसदों में से 17 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की थी। उन्होंने अपने गुट के नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय की जानकारी देते हुए लोकसभा में अलग पहचान और बैठने की व्यवस्था की मांग की थी।

वहीं टीएमसी नेतृत्व का कहना है कि उन्हें इस मामले में पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। पार्टी सूत्रों के अनुसार 15 जून को दोपहर में स्पीकर कार्यालय की ओर से सांसद अभिषेक बनर्जी को ईमेल भेजकर उसी दिन शाम को बैठक के लिए बुलाया गया था।

टीएमसी का दावा है कि उस समय अभिषेक बनर्जी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पूछताछ में शामिल थे और उनके पास फोन या ईमेल देखने की सुविधा नहीं थी। पार्टी के अनुसार बाद में सांसद कीर्ति आजाद को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला कार्यालय से फोन किया गया, जिसके बाद वे वहां पहुंचे और अभिषेक बनर्जी की अनुपस्थिति की जानकारी देते हुए बैठक के लिए नई तारीख देने का अनुरोध किया।

अब सभी की नजरें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के फैसले पर टिकी हैं। यह निर्णय न केवल टीएमसी की संसदीय स्थिति बल्कि लोकसभा में विपक्षी राजनीति के समीकरणों पर भी असर डाल सकता है।

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