



जयपुर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा की बर्खास्तगी का मामला करीब पौने तीन साल बाद भी लंबित है। यह फैसला अब राज्य सरकार, राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर लंबित प्रक्रिया के कारण अटका हुआ है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कटारा की अंतरिम जमानत रद्द कर दी है, लेकिन उनकी बर्खास्तगी पर अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
पेपर लीक केस में हुई थी गिरफ्तारी
वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 के पेपर लीक मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने 18 अप्रैल 2023 को बाबूलाल कटारा, उसके ड्राइवर गोपाल सिंह और विजय कटारा को गिरफ्तार किया था। इसके बाद जनवरी 2024 में तत्कालीन राज्यपाल कलराज मिश्र ने कटारा को निलंबित कर दिया था।
बर्खास्तगी की लंबी संवैधानिक प्रक्रिया
संविधान के अनुसार, राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य या अध्यक्ष को हटाने के लिए सरकार पहले रिपोर्ट राज्यपाल को भेजती है। इसके बाद मामला राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है और सुप्रीम कोर्ट की जांच के आधार पर अंतिम आदेश जारी होता है।
राज्य सरकार दो साल पहले ही कटारा की बर्खास्तगी का प्रस्ताव राष्ट्रपति और राज्यपाल को भेज चुकी है, लेकिन प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो पाई है।
जांच में मिली आय से अधिक संपत्ति
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच में कटारा के पास करीब 60% अधिक संपत्ति पाई गई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, उसके पास से 51.20 लाख रुपए नकद और 500 ग्राम से अधिक सोने के आभूषण भी बरामद हुए।
ट्रायल में देरी के आरोप
सरकार की ओर से कोर्ट में बताया गया कि कटारा ने कई बार ट्रायल को स्थगित करवाया, जिससे सुनवाई में अनावश्यक देरी हुई। उसके खिलाफ 5 आपराधिक मामले लंबित हैं और प्रवर्तन निदेशालय (ED) में भी मामला दर्ज है।
सरकारी आवास से हुआ पेपर लीक
जांच में सामने आया कि कटारा ने सेकेंड ग्रेड शिक्षक भर्ती-2022 का पेपर अपने सरकारी आवास से लीक किया था। यह पेपर पहले 60 लाख रुपए में बेचा गया और बाद में 80 लाख रुपए में दूसरी डील हुई।
इस पूरे मामले का खुलासा 24 दिसंबर 2022 को उदयपुर के बेकरिया थाना क्षेत्र में हुआ, जब पुलिस ने एक बस से 49 अभ्यर्थियों को पकड़ा, जो परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र हल कर रहे थे।