



जयपुर। राजस्थान में समय पर पंचायत चुनाव कराने को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाई है। इसका मुख्य कारण अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की जनसंख्या से जुड़े सही और निर्धारित फॉर्मेट में आंकड़े उपलब्ध नहीं हो पाना है।
पंचायतीराज विभाग अब तक OBC आयोग को आवश्यक डेटा नहीं दे पाया है। जिला कलेक्टर्स से भी आयोग को अपेक्षित सहयोग नहीं मिला, जिसके चलते आयोग को मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को पत्र लिखना पड़ा।
OBCआयोग ने उठाई डेटा की गुणवत्ता पर आपत्ति
OBC आयोग के सचिव (सलाहकार) अशोक जैन ने 24 फरवरी 2026 को लिखे पत्र में स्पष्ट कहा कि उपलब्ध कराए गए आंकड़े अधूरे और त्रुटिपूर्ण हैं। ऐसे डेटा के आधार पर पंचायतों में वार्ड पंचों के लिए आरक्षण तय करना संभव नहीं है।
आयोग ने सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देश जारी करने की मांग की, ताकि सही और पूर्ण जानकारी संबंधित अधिकारियों से लेकर जल्द आयोग को भेजी जा सके।
फाइलों में उलझा मामला
मुख्य सचिव वी श्रीनिवासने 25 फरवरी को यह मामला पंचायतीराज विभाग को भेज दिया, लेकिन वहां से इसे आगे आयोजना विभाग को भेज दिया गया। पंचायतीराज विभाग के शासन सचिव जोगाराम ने पत्र लिखकर कहा कि जनाधार प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़े गलत और अधूरे हैं।
वहीं आयोजना विभाग के शासन सचिव रविकुमार का कहना है कि पत्र मिला है और इस पर काम शुरू कर दिया गया है। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए 15 अप्रैल तक आयोग को सही आंकड़े मिलना मुश्किल माना जा रहा है।
OBCआयोग का नया फॉर्मेट बना चुनौती
OBC आयोग ने अब एक नया विस्तृत फॉर्मेट जारी किया है, जिसमें जिला, पंचायत समिति, ग्राम पंचायत, कुल सीटें, कुल जनसंख्या, SC/ST और OBC जनसंख्या, प्रतिशत और आरक्षण का पूरा विवरण मांगा गया है। सरकार पहले बिना तय फॉर्मेट के आंकड़े दे चुकी है, जिन्हें आयोग ने खारिज कर दिया है।
चुनाव की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचनआयोग की
राज्य निर्वाचन आयोग के पूर्व आयुक्त मधुकर गुप्ता का कहना है कि चुनाव की तारीख तय करना सरकार का नहीं, बल्कि राज्य निर्वाचन आयोग का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट भी कई मामलों में स्पष्ट कर चुका है कि OBC आयोग की रिपोर्ट के बिना भी चुनाव कराए जा सकते हैं। कानून के अनुसार, पंचायत चुनाव पांच साल की अवधि पूरी होने से पहले हर हाल में कराना अनिवार्य है।