



जयपुर। ब्रह्मपुरी स्थित गढ़ गणेश मंदिर तक रोप-वे निर्माण का रास्ता अब साफ हो गया है। राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में दायर याचिका को निस्तारित करते हुए करीब डेढ़ साल पहले लगाए गए यथास्थिति के आदेश को हटा लिया है। जस्टिस गणेश राम मीणा की अदालत ने दामोदर रोपवेज की याचिका को मेंटिनेबल नहीं मानते हुए खारिज कर दिया। हालांकि अदालत ने याचिकाकर्ता को 15 दिन के भीतर राज्य सरकार के समक्ष अपील दायर करने की छूट भी दी है। इससे पहले हाईकोर्ट ने 1 अगस्त 2024 को रोप-वे निर्माण पर यथास्थिति के आदेश दिए थे, जिसके कारण निर्माण कार्य रुका हुआ था। अब याचिका खारिज होने के बाद रोप-वे परियोजना का काम दोबारा शुरू होने की संभावना है।
इस परियोजना को लेकर पहले भी विवाद सामने आया था। अक्टूबर 2023 में रोप-वे का शिलान्यास और भूमि पूजन कार्यक्रम चर्चा में रहा था, जब तत्कालीन जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी शिलान्यास के लिए पहुंचे थे, लेकिन राज्य में चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण अधिकारियों ने कार्यक्रम को रोक दिया था। सुनवाई के दौरान मंदिर श्री गढ़ गणेश जी ट्रस्ट की ओर से अधिवक्ता अभि गोयल और अतिरिक्त महाधिवक्ता जीएस गिल ने तर्क दिया कि रोपवे अधिनियम की धारा 22 के तहत कलेक्टर के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार के समक्ष अपील का वैकल्पिक प्रावधान उपलब्ध है, इसलिए याचिका खारिज की जानी चाहिए।
वहीं याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि सरकार ने रोप-वे निर्माण की अनुमति मंदिर ट्रस्ट को दी थी, लेकिन ट्रस्ट ने यह काम मैसर्स शिवम प्राइम इन्फ्रा को सौंप दिया, जिसने रोपवे निर्माण के लिए आवेदन ही नहीं किया था और उसके पास इस कार्य का अनुभव भी नहीं है। साथ ही आरटीपीपी एक्ट के प्रावधानों की पालना नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका को निस्तारित कर दिया।