Thursday, 08 January 2026

निकाय चुनाव में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए वीडियोग्राफी अनिवार्य: राज्य निर्वाचन आयोग ने जारी किए विस्तृत दिशा-निर्देश, रिकॉर्डिंग के लिए शुल्क और प्रक्रिया तय


निकाय चुनाव में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए वीडियोग्राफी अनिवार्य: राज्य निर्वाचन आयोग ने जारी किए विस्तृत दिशा-निर्देश, रिकॉर्डिंग के लिए शुल्क और प्रक्रिया तय

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जयपुर। आगामी नगरीय निकाय एवं पंचायत चुनावों को निष्पक्ष, पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाने के उद्देश्य से राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान ने चुनाव प्रक्रिया की वीडियोग्राफी को लेकर विस्तृत आदेश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव से जुड़ी संवेदनशील और महत्वपूर्ण गतिविधियों की अनिवार्य रूप से वीडियोग्राफी कराई जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की शिकायत, विवाद या कानूनी प्रक्रिया के दौरान ठोस साक्ष्य उपलब्ध हो सकें।

आयोग के आदेशों के अनुसार मतदान से पहले, मतदान के दिन और मतगणना से जुड़ी कई गतिविधियों की रिकॉर्डिंग आवश्यक होगी। इसमें ईवीएम की प्रथम स्तरीय जांच, मतदान दलों की रवानगी, संवेदनशील और अति-संवेदनशील मतदान केन्द्रों पर मतदान प्रक्रिया, मतदान के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति, मतगणना प्रक्रिया तथा उम्मीदवारों या राजनीतिक दलों द्वारा की जा रही आपत्तियों से संबंधित घटनाएं शामिल हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि जहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार जिला निर्वाचन अधिकारी या रिटर्निंग अधिकारी आवश्यक समझें, वहां अतिरिक्त गतिविधियों की वीडियोग्राफी भी कराई जा सकती है।

रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने और उपलब्ध कराने की व्यवस्था

आदेशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि चुनाव से संबंधित सभी वीडियो रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएंगे। यदि किसी चुनाव याचिका, शिकायत या न्यायिक प्रक्रिया के लिए वीडियो की आवश्यकता होती है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत इसकी प्रति उपलब्ध कराई जाएगी। रिकॉर्डिंग की सीडी/डीवीडी या डिजिटल कॉपी को सुरक्षित भंडारण में रखा जाएगा और केवल अधिकृत आदेश पर ही जारी किया जाएगा।

वीडियोग्राफी के लिए शुल्क तय

राज्य निर्वाचन आयोग ने वीडियोग्राफी उपलब्ध कराने के लिए शुल्क भी निर्धारित किया है। आदेश के अनुसार, किसी रिकॉर्डिंग की प्रति प्राप्त करने के लिए आवेदनकर्ता को प्रति सीडी/डीवीडी या प्रति घंटे के हिसाब से निर्धारित शुल्क जमा कराना होगा। शुल्क की राशि रिकॉर्डिंग के प्रकार और अवधि के अनुसार तय की गई है। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि रिकॉर्डिंग का दुरुपयोग न हो और केवल वास्तविक आवश्यकता वाले मामलों में ही इसका उपयोग किया जाए।

चुनावी पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम

आयोग का मानना है कि वीडियोग्राफी से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी और मतदाताओं का विश्वास मजबूत होगा। साथ ही, इससे चुनाव से जुड़े विवादों के त्वरित और निष्पक्ष निपटारे में भी मदद मिलेगी। जिला प्रशासन और निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन आदेशों की सख्ती से पालना सुनिश्चित करें।


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