



राजस्थान की राजनीति में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) प्रमुख एवं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के बीच चल रहा बयानबाजी का विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। बेनीवाल की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस के बाद गुरुवार को मदन राठौड़ ने पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया देते हुए राजनीतिक संवाद में शालीनता और मर्यादा बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
जयपुर स्थित भाजपा मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए राठौड़ ने कहा कि उन्हें कानूनी नोटिस प्राप्त हो चुका है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह नोटिस का औपचारिक जवाब देंगे या नहीं। उन्होंने कहा कि मामले के सभी कानूनी पहलुओं का परीक्षण उनके अधिवक्ताओं द्वारा किया जा रहा है और आगे की रणनीति कानूनी सलाह के आधार पर तय की जाएगी।
राठौड़ ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतभेद, आलोचना और विरोध स्वाभाविक हैं, लेकिन राजनीतिक विमर्श का स्तर गिरना चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि राजनीति को सकारात्मक दिशा देने के लिए सभी जनप्रतिनिधियों को अपने शब्दों और व्यवहार में संयम एवं मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि सार्वजनिक जीवन में भाषा की गरिमा बनाए रखना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी मुद्दे पर अपनी बात रखना, निवेदन करना या प्रार्थना करना लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है और इसे गलत अर्थों में नहीं लिया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले हनुमान बेनीवाल ने मदन राठौड़ को कानूनी नोटिस भेजकर सार्वजनिक माफी की मांग की थी। बेनीवाल का आरोप है कि 30 मई को एक सार्वजनिक कार्यक्रम और मीडिया बातचीत के दौरान राठौड़ द्वारा दिए गए कुछ बयान उनकी राजनीतिक छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले थे।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि कुछ टिप्पणियां व्यक्तिगत और आपत्तिजनक प्रकृति की थीं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और स्वस्थ राजनीतिक संवाद के अनुरूप नहीं हैं। यह नोटिस दिल्ली स्थित एक विधि फर्म के माध्यम से भेजा गया है।
इस घटनाक्रम के बाद राजस्थान की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी समय में दोनों नेताओं के बीच यह विवाद और आगे बढ़ सकता है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि मदन राठौड़ कानूनी नोटिस का औपचारिक जवाब देते हैं या नहीं।