Saturday, 18 April 2026

महिला आरक्षण बिल पर सियासत तेज: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का कांग्रेस पर हमला, कहा- “महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी”


महिला आरक्षण बिल पर सियासत तेज: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का कांग्रेस पर हमला, कहा- “महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी”

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लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण विधेयक के विरोध को देश की महिलाएं कभी नहीं भूलेंगी और आने वाले समय में इसका जवाब जरूर देंगी।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राठौड़ ने कांग्रेस के ऐतिहासिक फैसलों पर सवाल उठाते हुए शाहबानो प्रकरण का हवाला दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय कांग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निष्प्रभावी बनाकर एक महिला को न्याय से वंचित किया था। उनके अनुसार, यह कदम न केवल एक महिला के साथ अन्याय था, बल्कि करोड़ों मुस्लिम महिलाओं के आत्मसम्मान को भी ठेस पहुंचाने वाला था।

उन्होंने कांग्रेस को “महिला विरोधी” करार देते हुए कहा कि पार्टी ने हमेशा महिलाओं को केवल “साइलेंट वोटर” के रूप में देखा, जबकि आज की महिलाएं हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। उद्योग, विज्ञान, अंतरिक्ष और राजनीति—हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है और अब वे देश के भविष्य को दिशा देने वाली शक्ति बन चुकी हैं।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राठौड़ ने कहा कि महिलाओं को विधानसभा और लोकसभा में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए और भारतीय जनता पार्टी इस दिशा में ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।

इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने भैंरो सिंह शेखावत और अटल बिहारी वाजपेयी के प्रयासों को याद किया, जिन्होंने पंचायतों और निकायों में महिलाओं को आरक्षण देकर उनके राजनीतिक सशक्तिकरण की नींव रखी।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राठौड़ ने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण विधेयकों के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है, इसलिए सभी दलों से सहयोग की अपेक्षा होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को महिलाओं को अधिक अधिकार मिलने से अपने राजनीतिक आधार के कमजोर होने का डर है, इसी कारण वह ऐसे विधेयकों का समर्थन करने से बचती रही है।

उन्होंने अंत में कहा कि यह सोच देश के लोकतांत्रिक विकास में बाधक है और अब समय आ गया है कि सभी दल महिलाओं के अधिकार और सम्मान को प्राथमिकता दें। देश की महिलाएं अब जागरूक हैं और अपने अधिकारों के लिए किसी भी राजनीतिक चाल को स्वीकार नहीं करेंगी।

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