



जयपुर। राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत राज्य कृषि प्रबंधन संस्थान, दुर्गापुरा (जयपुर) में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय सेमिनार बुधवार को संपन्न हुआ। इस सेमिनार का उद्घाटन कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने किया था, जिसमें राज्य के 12 जिलों—डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर, सिरोही, राजसमंद, पाली, चित्तौड़गढ़, सलूम्बर, कोटा, बारां, झालावाड़ और प्रतापगढ़ से लगभग 100 स्टेकहोल्डर्स ने भाग लिया।
सेमिनार में बांस को एक बहुउपयोगी, तेजी से विकसित होने वाली और पर्यावरण के अनुकूल वनस्पति के रूप में रेखांकित किया गया, जो ग्रामीण आजीविका बढ़ाने, मृदा संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। विशेषज्ञों ने बताया कि विशेष रूप से दक्षिणी राजस्थान के कृषि-जलवायु क्षेत्रों में बांस की खेती की अपार संभावनाएं हैं और वर्तमान में राज्य के लगभग 2.5 प्रतिशत वन क्षेत्र में बांस उपलब्ध है, जो जनजातीय क्षेत्रों की आजीविका का प्रमुख आधार है।
राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत बांस उत्पादन, प्रसंस्करण और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2025-26 में 93.38 लाख रुपये की कार्ययोजना स्वीकृत की गई है, जिसमें प्रशिक्षण, अंतरराज्यीय भ्रमण, उच्च तकनीक नर्सरियों की स्थापना और सेमिनार शामिल हैं। वहीं आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 12 जिलों में बांस नर्सरी, पौधारोपण, कॉमन फैसिलिटी सेंटर और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संचालन हेतु 303.79 लाख रुपये की योजना केंद्र सरकार को भेजी गई है।
सेमिनार के दौरान बांस आधारित खेती की संभावनाएं, रोपण एवं फसल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन में भूमिका, ग्रामीण उद्यमिता, मूल्य संवर्धन, विपणन और आपूर्ति श्रृंखला जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। साथ ही “राजस्थान में बांस अर्थव्यवस्था का विस्तार” विषय पर पैनल चर्चा, किसान-वैज्ञानिक संवाद और प्रतिभागी सुझाव सत्र आयोजित किए गए, जिनमें कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। यह आयोजन बांस आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।