



जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सचिवालय में एलपीजी, पेट्रोल, डीजल, उर्वरक आपूर्ति और वैकल्पिक ईंधन की उपलब्धता को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में स्पष्ट किया गया कि प्रदेश में इन सभी आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और आमजन को किसी प्रकार की कमी को लेकर चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने विशेष रूप से कहा कि भ्रामक अफवाहों से बचें और किसी भी तरह की गलत सूचना से घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखें और आमजन को राहत देने के लिए जिम्मेदारी का प्रभावी निर्वहन करें।
बैठक में अवैध भंडारण, कालाबाजारी और डाइवर्जन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। साथ ही हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों के समयबद्ध समाधान और बाजार में कीमतों की निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने यह भी निर्देश दिए कि भ्रामक खबरों के माध्यम से किसी प्रकार का पैनिक न फैले, इसके लिए विशेष सतर्कता बरती जाए। साथ ही खाड़ी देशों में कार्यरत प्रवासी राजस्थानियों से संपर्क बनाए रखने और प्रदेश में मौजूद श्रमिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, यह सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
पीएनजी कनेक्शन के विस्तार को लेकर भी बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि जिन क्षेत्रों में पीएनजी पाइपलाइन उपलब्ध है, वहां प्राथमिकता से आमजन और संस्थानों को कनेक्शन दिए जाएं। इसके साथ ही व्यावसायिक एलपीजी उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन लेना अनिवार्य किया गया है। गोबरधन योजना और बायोगैस प्लांट्स को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के 24 जिलों में गोबरधन योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।
कृषि विभाग ने जानकारी दी कि प्रदेश में यूरिया, डीएपी सहित उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और किसानों को किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी। साथ ही बायो उर्वरकों के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। बैठक में इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए 591 नए चार्जिंग पॉइंट स्थापित करने और ईवी पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने की योजना पर भी चर्चा हुई। ऊर्जा विभाग ने बताया कि अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने के तहत पीएम कुसुम योजना में 10,000 मेगावाट क्षमता की स्वीकृति दी जा चुकी है।