



राजस्थान के जलदाय विभाग में जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले के बाद प्रशासनिक फेरबदल और निलंबन की कार्रवाई के बीच अब नए पदस्थापन आदेश को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विभाग द्वारा सस्पेंड किए गए चीफ इंजीनियरों के पदों पर दूसरे जिलों में कार्यरत एडिशनल चीफ इंजीनियरों को अतिरिक्त चार्ज सौंप दिया गया है, जबकि विभागीय मुख्यालय जल भवन, जयपुर में ही उनसे वरिष्ठ अधिकारी उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें जिम्मेदारी नहीं दी गई।
बताया जा रहा है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में 100 से 250 किलोमीटर दूर तैनात अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देने से आगामी गर्मियों में जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। एक अधिकारी को दो-दो महत्वपूर्ण पदों का कार्यभार संभालना पड़ेगा, जिससे प्रशासनिक और तकनीकी निर्णयों में देरी संभव है। विभाग ने रविवार को आदेश जारी करते हुए चीफ इंजीनियर (शहरी) मनीष बेनीवाल को एपीओ कर दिया, जिसके बाद पूरे पदस्थापन आदेश पर सवाल उठने लगे हैं।
नए आदेश के तहत जोधपुर प्रोजेक्ट के चीफ इंजीनियर देवराज सोलंकी को जयपुर स्थित चीफ इंजीनियर (शहरी) का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। गौरतलब है कि जयपुर और जोधपुर के बीच लगभग 334 किलोमीटर की दूरी है, ऐसे में दोनों महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी एक साथ निभाना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। वहीं जयपुर के जल भवन में तैनात नीरज माथुर, संदीप शर्मा और आर.के. मीणा जैसे वरिष्ठ चीफ इंजीनियरों की अनदेखी किए जाने से विभागीय स्तर पर असंतोष की चर्चा भी सामने आई है।
इसी प्रकार भरतपुर प्रोजेक्ट के एडिशनल चीफ इंजीनियर सुरेंद्र शर्मा को चीफ इंजीनियर (ग्रामीण) का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है, जबकि जयपुर में ही कई एडिशनल चीफ इंजीनियर पहले से पदस्थ हैं। वरिष्ठता सूची में शामिल अधिकारियों को जिम्मेदारी न दिए जाने और एपीओ अधिकारियों को कार्य नहीं सौंपने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
देवराज सोलंकी (सीई, जोधपुर प्रोजेक्ट) – चीफ इंजीनियर (शहरी)
सुरेंद्र शर्मा (एसीई, भरतपुर प्रोजेक्ट) – चीफ इंजीनियर (ग्रामीण)
शैतान सिंह (एसीई, उदयपुर रीजन) – चीफ इंजीनियर प्रोजेक्ट, उदयपुर
मुकेश बंसल (एसीई, अतिरिक्त सचिव कार्यालय) – चीफ इंजीनियर (प्रशासन)
अजय सिंह राठौड़ (एसीई, जयपुर रीजन प्रथम) – एसीई जयपुर शहर रीजन द्वितीय
राममूर्ति चौधरी (एसई प्रोजेक्ट, चूरू) – एडिशनल चीफ इंजीनियर, चूरू रीजन
इस बीच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने भी जेजेएम से जुड़े प्रकरण संख्या 11/2026 में कार्रवाई तेज कर दी है। एसीबी ने स्पेशल प्रोजेक्ट चीफ इंजीनियर से मैसर्स भूरम कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिए गए टेंडरों से संबंधित पूरी पत्रावली मांगी है। जानकारी के अनुसार, कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद उसे टेंडर मिलने में दिक्कत आ रही थी, वहीं यह भी चर्चा है कि कुछ अधिकारियों पर कंपनी को पात्र ठहराने के लिए दबाव बनाया जा रहा था।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को जेजेएम घोटाले के बाद विभाग में चल रही अंदरूनी खींचतान और प्रशासनिक पुनर्संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मियों से पहले जलदाय विभाग में स्थिर और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था बेहद जरूरी है, अन्यथा प्रदेश की जलापूर्ति व्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।