



जयपुर। राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को एप्रोप्रिएशन बिल पर बहस के दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर तीखे हमले बोले। अपने संबोधन में जूली ने कई मुद्दों को उठाते हुए कहा कि वे सदन की मर्यादा का पालन कर रहे हैं, अन्यथा “एक-एक परत यहीं खुल जाती।” उन्होंने कहा कि “एपस्टिन फाइल को छोड़ दीजिए, उससे भी बड़ी फाइल है,” और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
जूली ने कहा कि चाहे कोई भी व्यक्ति हो, भले ही वह भाजपा से जुड़ा क्यों न हो, दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने उदयपुर से जुड़े एक प्रकरण का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि मामले में कार्रवाई में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। जूली ने कहा कि घटना में रात 11 बजे रिपोर्ट दर्ज हुई और कुछ घंटों में पुलिस कार्रवाई हुई, लेकिन सीसीटीवी फुटेज और जब्त मोबाइल के संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने सरकार से जवाब मांगा कि सबूत अब तक सार्वजनिक या अपलोड क्यों नहीं किए गए।
नेता प्रतिपक्ष ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए 2026 तक की सभी भर्ती परीक्षाओं की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि पेपर लीक और पारदर्शिता से जुड़े सवालों पर सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
जूली ने मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि “2 साल बनाम 5 साल” की बहस का प्रस्ताव खुद सरकार ने रखा था, फिर उससे पीछे क्यों हटे। उन्होंने शायराना अंदाज में कहा, “मिटानी थी गरीबी, गरीबों को मिटा दिया,” और दावा किया कि कई जनहितकारी योजनाओं को बंद या सीमित कर दिया गया है। उन्होंने गिग वर्कर कानून, राजीव गांधी स्कॉलरशिप, स्मार्टफोन योजना, चिरंजीवी योजना और आरजीएचएस भुगतान जैसे मुद्दों पर भी सवाल उठाए।
आरसीए चुनाव, कॉल सेंटर में आईएएस अधिकारियों की तैनाती और कलेक्टरों द्वारा कथित फर्जी प्रमाणपत्रों से पुरस्कार लेने जैसे मुद्दों पर भी जूली ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि विपक्ष का दायित्व है सवाल उठाना और वे जनता के मुद्दों पर पीछे नहीं हटेंगे।
सदन में जूली के बयान के दौरान सत्तापक्ष की ओर से भी आपत्तियां दर्ज कराई गईं, जिससे माहौल कुछ समय के लिए गरमा गया। हालांकि बहस बाद में सामान्य प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ी।