Friday, 27 February 2026

गुरुवार को बायकॉट, शुक्रवार को विधानसभा में गूंजा ठहाकों का दौर डोटासरा-देवनानी और जूली-पटेल के बीच हल्की नोकझोंक


गुरुवार को बायकॉट, शुक्रवार को विधानसभा में गूंजा ठहाकों का दौर डोटासरा-देवनानी और जूली-पटेल के बीच हल्की नोकझोंक

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जयपुर। राजस्थान विधानसभा में 26 फरवरी को कांग्रेस विधायक श्रवण कुमार को बोलने से रोकने के मुद्दे पर बना गतिरोध अब समाप्त हो गया है। जहां एक ओर कल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सदन से बायकॉट किया था, वहीं आज अप्रोप्रिएशन बिल पर बहस शुरू होने से पहले सदन में हंसी-मजाक और हल्की नोकझोंक का माहौल देखने को मिला।

बहस से पहले कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने  विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी से मजाकिया अंदाज में पूछा कि उम्र में आप बड़े हैं या श्रवण कुमार? इस पर देवनानी ने मुस्कुराते हुए कहा कि यह तो आप तय करें। डोटासरा ने फिर कहा कि उम्र में आप बड़े हैं तो बड़ों को क्षमा करनी चाहिए। इस पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने हंसते हुए जवाब दिया कि छोटों को भी बड़ों की बात माननी चाहिए, खासकर जब कोई बिल्कुल भी न माने।

इसी दौरान सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने चुटकी लेते हुए कहा कि बड़ा-छोटा तब तय होगा जब श्रवणजी अपनी असली जन्मतिथि बताएंगे। इस टिप्पणी पर सदन में ठहाके गूंज उठे और माहौल हल्का हो गया।

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब हम बायकॉट करके जाते हैं तो पीछे से टिप्पणियां की जाती हैं, जो उचित नहीं है। जो कहना है, सामने कहा जाए। इस पर जोगाराम पटेल ने भी हंसते हुए जवाब दिया कि आप बायकॉट करके जाएंगे तभी तो हमें कहने का मौका मिलेगा कि यह गलत है। स्पीकर ने बीच-बचाव करते हुए कहा कि अब कोशिश होनी चाहिए कि बायकॉट की नौबत ही न आए।

सदन में गतिरोध को लेकर संसदीय कार्य मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सदन में सौहार्द बनाए रखने की जिम्मेदारी सत्तापक्ष निभाएगा। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने भी कहा कि कल की स्थिति को समझना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अध्यक्ष द्वारा एक बार फैसला कर देने के बाद उसका पालन आवश्यक है। आगे से बोलने वाले सदस्यों के नाम पहले से तय करने का सुझाव भी दिया गया, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

गुरुवार को के तनावपूर्ण माहौल के बाद शुक्रवार को विधानसभा में हल्के-फुल्के संवाद और राजनीतिक व्यंग्य के बीच बहस की शुरुआत हुई, जिससे सदन की कार्यवाही सामान्य और सकारात्मक माहौल में आगे बढ़ी।

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