



जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ वेटेनरी एंड एनिमल साइंसेज (राजुवास) के कुलगुरु (वाइस चांसलर) की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे को नोटिस जारी किया है। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने डॉ. आर. के. बाघेरवाल द्वारा दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद राज्यपाल सहित संबंधित पक्षों से तीन सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है।
याचिका में राज्यपाल द्वारा 4 सितंबर 2025 को डॉ. संमत व्यास को कुलगुरु नियुक्त किए जाने की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह नियुक्ति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत की गई है, इसलिए इसे निरस्त किया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश यादव ने अदालत को बताया कि वीसी चयन के लिए राज्यपाल के आदेश से 3 मई 2025 को सर्च कमेटी गठित कर विज्ञापन जारी किया गया था। लेकिन यूजीसी के नियमानुसार सर्च कमेटी का अध्यक्ष उस विश्वविद्यालय से संबद्ध नहीं होना चाहिए। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रोफेसर त्रिभुवन शर्मा को सर्च कमेटी का चेयरमैन बनाया, जो पूर्व में विश्वविद्यालय के एनिमल न्यूट्रिशन विभाग के विभागाध्यक्ष रह चुके हैं।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि नियुक्त कुलगुरु डॉ. संमत व्यास आवश्यक योग्यता पूरी नहीं करते, क्योंकि उनके पास वीसी पद के लिए अनिवार्य माने जाने वाला न्यूनतम 10 वर्ष का शिक्षण अनुभव नहीं है। याचिकाकर्ता ने इसे नियुक्ति प्रक्रिया में गंभीर नियम उल्लंघन बताते हुए अदालत से नियुक्ति रद्द करने की मांग की है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्यपाल, नियुक्त कुलगुरु, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार तथा राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब अगली सुनवाई में सभी पक्षों के जवाब के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई तय करेगी।