Wednesday, 11 February 2026

डबल इंजन का दोहरा कुठाराघात’: सचिन पायलट ने राज्य बजट को बताया निराशाजनक


डबल इंजन का दोहरा कुठाराघात’: सचिन पायलट ने राज्य बजट को बताया निराशाजनक

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जयपुर। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने भाजपा सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत राज्य बजट 2026-27 को प्रदेश की जनता के लिए निराशाजनक बताते हुए इसे “डबल इंजन की सरकार का दोहरा कुठाराघात” करार दिया। पायलट ने कहा कि पहले केंद्र सरकार के बजट में राजस्थान की अनदेखी की गई और अब राज्य बजट ने किसानों, युवाओं, महिलाओं और मध्यम वर्ग की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

पायलट ने झालावाड़ की एक स्कूल में हुए हादसे का हवाला देते हुए कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट ने स्कूलों की बदहाल स्थिति पर सरकार को फटकार लगाई थी और सरकार ने हलफनामे में 21 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता स्वीकार की थी। इसके बावजूद बजट में मात्र 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाना छात्रों की सुरक्षा के प्रति उदासीनता दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बच्चों के भविष्य को अंधेरे में धकेलने का काम किया है।

राज्य की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठाते हुए पायलट ने कहा कि वित्तीय कुप्रबंधन के कारण राजस्व घाटा बढ़ रहा है और सरकार को कर्ज लेना पड़ेगा, जिससे महंगाई और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि बजट में शब्दों का मायाजाल रचकर सरकार अपनी दो वर्षों की नाकामियों को छिपाने का प्रयास कर रही है। हाईटेक सिटी, आईटी सिटी और एयरो सिटी जैसी घोषणाएं कागजों तक सीमित हैं और पिछले बजट की उपलब्धियों पर सरकार मौन है।

बेरोजगारी के मुद्दे पर पायलट ने सरकार को घेरते हुए कहा कि चार लाख नौकरियां देने का वादा अधूरा है और निजी क्षेत्र में रोजगार के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए जा रहे हैं। किसानों के संदर्भ में उन्होंने आरोप लगाया कि नहरी क्षेत्रों में फार्म पॉन्ड सब्सिडी दो साल से बंद है और सामाजिक सुरक्षा पेंशन में बढ़ोतरी नहीं करना गरीबों के साथ अन्याय है।

औद्योगिक और पर्यावरणीय नीति पर भी उन्होंने सवाल उठाए। पायलट ने कहा कि टेक्सटाइल उद्योग पर अमेरिकी टैरिफ के संभावित प्रभाव और सोलर पार्कों के विस्तार के बीच राज्यवृक्ष खेजड़ी के संरक्षण को लेकर सरकार की कोई स्पष्ट नीति नहीं है। उन्होंने “राइजिंग राजस्थान” निवेश कार्यक्रम और जल जीवन मिशन के लिए केंद्र से पर्याप्त फंडिंग न मिलने के मुद्दे पर भी पारदर्शिता की मांग की।

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