Wednesday, 11 February 2026

“न विजन, न नीति, न नीयत”: टीकाराम जूली ने बजट 2026–27 को बताया ‘विश्वासघाती’


“न विजन, न नीति, न नीयत”: टीकाराम जूली ने बजट 2026–27 को बताया ‘विश्वासघाती’

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जयपुर। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य बजट 2026–27 पर तीखा हमला बोलते हुए इसे ‘खोखला’, ‘सतही’ और ‘विश्वासघाती’ बजट करार दिया। उन्होंने कहा कि यह बजट प्रदेश की प्रगति को गति देने के बजाय विकास के पहियों को थामने वाला दस्तावेज साबित होगा।

जूली ने बजट पर शेर के जरिए तंज कसते हुए कहा –
"तुम्हारे पाँवों के नीचे कोई ज़मीन नहीं,
कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यक़ीन नहीं।"

2718 घोषणाओं में 70% अधूरी: कथनी-करनी का फर्क

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि पिछले दो बजटों में की गई 2718 घोषणाओं में से केवल 900 (करीब 30%) ही पूरी हुई हैं, जबकि 284 परियोजनाओं पर काम तक शुरू नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सरकार 2026 की जमीनी हकीकत से अनजान है, लेकिन 2047 के सपने दिखाकर जवाबदेही से बच रही है।

जल जीवन मिशन पर सवाल

जल जीवन मिशन को बड़ी विफलता बताते हुए जूली ने कहा कि 45 लाख नल कनेक्शन देने का वादा किया गया था, लेकिन सरकार ने खुद स्वीकार किया कि केवल 14 लाख कनेक्शन ही दिए जा सके। इसे उन्होंने जनता के साथ “सीधा विश्वासघात” बताया।

वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप

जूली ने वित्तीय स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई:

  • राजस्व घाटा ₹31,009 करोड़ से बढ़कर ₹32,982 करोड़

  • राजस्व प्राप्ति में ₹9,003 करोड़ की कमी

उन्होंने शेर के जरिए सरकार पर कटाक्ष किया –
"उम्र भर ग़ालिब यही भूल करता रहा,
धूल चेहरे पे थी आइना साफ़ करता रहा।"

‘नमो वन’ पर चापलूसी का आरोप

जूली ने ‘नमो वन’ और ‘नमो नर्सरी’ जैसी घोषणाओं को चापलूसी की राजनीति बताया। उनका कहना था कि जीवित व्यक्ति के नाम पर वन स्थापित करना भारतीय परंपराओं के विपरीत है और यह केवल सत्ता बचाने की कोशिश है।

शिक्षा और आधारभूत ढांचे पर सवाल

उन्होंने कहा कि 42,000 जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत पर सरकार चुप है। हिंदी की वकालत करने वाली सरकार ‘CM-RISE’ जैसे अंग्रेजी नामों का इस्तेमाल कर रही है। साथ ही रिफाइनरी के लोकार्पण में देरी और कुछ जिलों की अनदेखी को भी उन्होंने बजट की कमजोरी बताया।

संवेदनशील मुद्दों पर सरकार का रवैया

मानसिक स्वास्थ्य जैसे गंभीर विषय पर बजट चर्चा के दौरान कथित हंसी-मजाक को उन्होंने निंदनीय बताया और कहा कि उच्च पदों पर बैठे लोगों से अधिक संवेदनशीलता की अपेक्षा की जाती है।

नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि बजट में न स्पष्ट विजन है, न नीति और न ही नीयत। उनके अनुसार, यह बजट घोषणाओं की पुनरावृत्ति भर है, जिसमें ठोस क्रियान्वयन का अभाव है।

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