



उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में मंगलवार रात एक अत्यंत दुखद घटना सामने आई, जहां 12 से 16 वर्ष की उम्र की तीन सगी बहनों ने एक साथ 9वीं मंज़िल की बालकनी से कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना रात करीब 2 बजे भारत सिटी बी-1 टावर के फ्लैट नंबर 907 में हुई। गिरने की आवाज सुनकर कॉलोनी के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। पुलिस के अनुसार, तीनों बहनें हाथ पकड़कर बालकनी से कूदी थीं।
एडिशनल पुलिस कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की पुष्टि हुई है और हर पहलू से मामले की जांच की जा रही है। पुलिस को मौके से 8–10 पन्नों का सुसाइड नोट मिला है, जिसमें ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े दबाव का उल्लेख बताया गया है। परिवार और पुलिस सूत्रों के अनुसार, बच्चियां लंबे समय से मोबाइल पर एक टास्क-आधारित ऑनलाइन “कोरियन लव गेम” से जुड़ी थीं।
पिता चेतन ने मीडिया को बताया कि उन्होंने बेटियों को गेम खेलने से रोका और फटकार लगाई थी, जिसके बाद यह कदम उठाया गया। सुसाइड नोट में कथित तौर पर लिखा गया है—“सॉरी पापा, हम गेम नहीं छोड़ सके।” पिता ने अन्य अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को अनियंत्रित मोबाइल गेमिंग से दूर रखें, क्योंकि टास्क-आधारित गेम्स में धीरे-धीरे मानसिक दबाव बढ़ाया जाता है।
पुलिस के मुताबिक, बच्चियां लगभग 80 फीट की ऊंचाई से गिरी थीं। सूचना मिलते ही उन्हें लोनी के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। एसपी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि मोबाइल फोन, चैट्स और डिजिटल ट्रेल की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस तरह के टास्क या दबाव में बच्चियां थीं और क्या किसी ने उन्हें डराया-धमकाया था।
कोरियन लव गेम क्या है?
यह कोई एक ऐप नहीं, बल्कि ऑनलाइन चैट/सोशल मीडिया के जरिए फैलने वाला पैटर्न है, जिसमें सामने वाला खुद को विदेशी बताकर दोस्ती-प्यार से भरोसा बनाता है। शुरुआत में आसान टास्क दिए जाते हैं, फिर धीरे-धीरे मानसिक दबाव बढ़ता है; कई मामलों में बात न मानने पर डराने-धमकाने के आरोप भी सामने आए हैं। इससे किशोरों में तनाव, व्यवहार में बदलाव और जोखिमपूर्ण कदमों का खतरा बढ़ जाता है।
महत्वपूर्ण अपील:
यदि आप या आपके आसपास कोई मानसिक दबाव, ऑनलाइन उत्पीड़न या आत्मघाती विचारों से जूझ रहा हो, तो तुरंत मदद लें। भारत में किरण मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन: 1800-599-0019 (24×7) पर संपर्क किया जा सकता है। बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर संवाद और निगरानी बेहद ज़रूरी है।