Wednesday, 04 February 2026

शौर्य और शहादत को सलाम: अमर शहीदों को समर्पित स्मृति, सम्मान और संकल्प का भावपूर्ण आयोजन


शौर्य और शहादत को सलाम: अमर शहीदों को समर्पित स्मृति, सम्मान और संकल्प का भावपूर्ण आयोजन

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जयपुर में कलमकार मंच के तत्वावधान में आज राजस्थान चेम्बर ऑफ़ कॉमर्स के सभागार में सुप्रसिद्ध चित्रकार चंद्रप्रकाश गुप्ता की बहुप्रतीक्षित पुस्तक “शौर्य और शहादत को सलाम” का गरिमामय लोकार्पण किया गया। यह आयोजन केवल एक पुस्तक विमोचन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के अमर शहीदों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सामूहिक स्मृति का भावपूर्ण उत्सव बन गया, जहां कला, संवेदना और राष्ट्रभाव एक साथ जीवंत हो उठे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि शहीदों के चित्र बनाकर उन्हें उनके परिजनों को भेंट करना चंद्रप्रकाश गुप्ता का अत्यंत संवेदनशील, निस्वार्थ और अनुकरणीय कार्य है। उन्होंने कहा कि आज के उपभोक्तावादी दौर में, जब भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त जैसे महान क्रांतिकारियों की स्मृतियां धुंधली होती जा रही हैं, तब एक कलाकार का दशकों तक इस “महायज्ञ” में निरंतर आहुति देना समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। यह कार्य न केवल कला साधना है, बल्कि राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध की भी मिसाल है।

इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विपिन कुमार पांडे ने कहा कि शहीदों के परिजनों को केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सम्मान और संवेदनशील स्मरण की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि चंद्रप्रकाश गुप्ता पिछले 27 वर्षों से इसी भाव के साथ कार्य कर रहे हैं और स्वयं वे इस यात्रा के साक्षी रहे हैं। पांडेय ने चित्रकार के व्यक्तित्व को विनम्र, समर्पित और प्रेरक बताते हुए कहा कि उनके बनाए महात्मा गांधी के स्केच देश-विदेश में लोकप्रिय हैं और कला के प्रति उनकी स्वयं की जागरूकता में भी गुप्ता का बड़ा योगदान रहा है।

वरिष्ठ पत्रकार जगदीश शर्मा ने कहा कि पुस्तक में प्रस्तुत व्यक्ति-चित्र और उनके साथ दिया गया विवरण केवल कलात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि सैनिकों के साहस के प्रति विनम्र नमन और शहीद परिवारों के प्रति मौन प्रणाम हैं। उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि “शहादत केवल सीमा पर नहीं होती, वह हर उस घर में रोज़ घटित होती है, जहां एक ख़ाली कुर्सी अधूरे सपने और गर्व से भरे आँसुओं की साक्षी बन जाती है।” उनके अनुसार यह पुस्तक स्मृति, सम्मान और संकल्प का ऐसा संगम है, जो स्वतंत्रता की कीमत का एहसास कराती है।

वरिष्ठ पत्रकार विनोद भारद्वाज ने कहा कि चंद्रप्रकाश गुप्ता की कला-यात्रा 1999 के कारगिल युद्ध के बाद एक ऐसे राष्ट्रीय संकल्प में परिवर्तित हुई, जिसकी मिसाल दुर्लभ है। उन्होंने बताया कि पुस्तक में शहीद परिवारों को चित्र भेंट करते समय के अनेक भावभीने संस्मरण संकलित हैं, जो पाठकों को भीतर तक संवेदित कर देते हैं। साथ ही उन सभी सहयोगियों का भी उल्लेख है, जिन्होंने इस अभियान को निरंतर संबल दिया।

कार्यक्रम में कलमकार मंच के राष्ट्रीय संयोजक निशांत मिश्रा ने सभी अतिथियों का पुस्तक-सेट भेंटकर स्वागत किया। इस अवसर पर चित्रकार चंद्रप्रकाश गुप्ता द्वारा उपस्थित शहीदों के परिजनों को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया, जिससे वातावरण और भी भावुक व गरिमामय हो उठा। कार्यक्रम का सुस्पष्ट और संवेदनशील संचालन नवल पाण्डेय ने किया।

कुल मिलाकर, यह आयोजन केवल एक साहित्यिक या कला कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि देश के अमर शहीदों के प्रति सामूहिक कृतज्ञता, स्मरण और सम्मान का जीवंत दस्तावेज़ बन गया, जिसमें कला और राष्ट्रभाव ने एक-दूसरे का हाथ थामे रखा।

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