Wednesday, 04 February 2026

अहिंसा केवल हथियार से मारना नहीं, किसी का दिल दुखाना भी हिंसा है: वसुंधरा राजे


अहिंसा केवल हथियार से मारना नहीं, किसी का दिल दुखाना भी हिंसा है: वसुंधरा राजे

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डीडवाना-कुचामन। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि जैन धर्म पूरी तरह अहिंसा पर आधारित है और किसी भी जीव या प्राणी के जीवन को नुकसान पहुंचाना हिंसा की श्रेणी में आता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंसा केवल हथियार से मारना-पीटना ही नहीं होती, बल्कि किसी का दिल दुखाना या तोड़ना भी हिंसा ही है। राजनीति में अक्सर ऐसा होता है, जहां दिल तोड़े भी जाते हैं और दुखाए भी जाते हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सोमवार को डीडवाना-कुचामन जिले के छोटी खाटू कस्बे में आयोजित आचार्य महाश्रमण मर्यादा महोत्सव को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि उन्हें राजमाता विजया राजे सिंधिया से यह संस्कार मिले हैं कि जीवन में कभी किसी का मन आहत नहीं करना चाहिए और वे उन्हीं के दिखाए मार्ग पर चलने का प्रयास कर रही हैं।

उन्होंने आगे कहा कि किसी के साथ अन्याय करना और किसी का अधिकार छीनना भी अधर्म है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास समय की कमी है, लेकिन यदि व्यक्ति थोड़ा समय निकालकर भगवान का स्मरण करे तो जीवन की कई कठिनाइयां अपने आप दूर हो सकती हैं।

इस अवसर पर युगप्रधान आचार्य महाश्रमण ने कहा कि व्यक्ति के जीवन में नैतिकता, सद्भावना और नशामुक्ति का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने वसुंधरा राजे की सराहना करते हुए कहा कि वे संस्कारवान जननेता हैं, जो संतों के समक्ष आसन या कुर्सी का उपयोग नहीं करतीं और विनम्रता के साथ कार्यक्रमों में सहभागिता निभाती हैं।

बयानों के सियासी मायने:
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के इस धार्मिक मंच से दिए गए वक्तव्य को सियासी नजरिए से भी अहम माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि वे पिछले कुछ समय से अपने बयानों के माध्यम से गूढ़ और संकेतात्मक सियासी संदेश देती रही हैं, जिन्हें मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

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