Wednesday, 04 February 2026

उच्च शिक्षा में गुणवत्ता से समझौता नहीं: राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, ‘सुधरो नहीं तो बंद करो’ नीति पर होगा अमल


उच्च शिक्षा में गुणवत्ता से समझौता नहीं: राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, ‘सुधरो नहीं तो बंद करो’ नीति पर होगा अमल

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जयपुर। राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े ने स्पष्ट किया है कि राज्य में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। कुलगुरु समन्वय समिति की बैठक को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि अब उच्च शिक्षा संस्थानों में “सुधरो नहीं तो बंद करो” की नीति पर कार्य किया जाएगा। जिन कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता नहीं है, उन्हें बंद किया जाए। साथ ही बिना अनुमति यदि किसी कॉलेज या शिक्षण संस्था को विश्वविद्यालय स्तर पर मान्यता दी गई है, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा विकास की नींव है, इसलिए स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं।

राज्यपाल बागड़े ने सभी विश्वविद्यालयों को नेशनल असेसमेंट एंड एक्रिडिटेशन काउंसिल (NAAC) रैंकिंग में सुधार के लिए समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कुलगुरुओं से विश्वविद्यालयवार NAAC में आ रही अड़चनों की जानकारी ली और कहा कि शैक्षिक गुणवत्ता, पाठ्यक्रम सुधार और शिक्षण पद्धतियों में नवाचार से जुड़ी प्रक्रियाओं को शीघ्र पूरा किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विश्वविद्यालयों से जुड़ी स्वीकृतियों और प्रस्तावों पर त्वरित निर्णय हों और किसी भी स्तर पर फाइलें लंबित न रखी जाएं। राज्य सरकार स्तर पर भर्ती और वित्तीय स्वीकृतियों से जुड़ी प्रक्रियाओं को भी शीघ्र पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।

बैठक में राज्यपाल बागड़े ने निर्देश दिए कि सभी विश्वविद्यालय हर वर्ष महालेखाकार (AG) ऑडिट अनिवार्य रूप से कराएं और ऑडिट टीम को पूर्ण सहयोग प्रदान करें। इसके साथ ही दीक्षांत समारोह हर वर्ष आयोजित किए जाएं और इन्हें न्यूनतम खर्च में संपन्न किया जाए। उन्होंने विश्वविद्यालयों को सुदृढ़ करने और नियुक्त कुलगुरुओं का मनोबल बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया।

राज्यपाल बागड़े ने नई शिक्षा नीति के अंतर्गत विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता विकसित करने और भारतीय इतिहास, संस्कृति, जीवन मूल्यों तथा ज्ञान परंपरा को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने निर्देश दिए कि पुस्तकों से लुप्त होते महत्वपूर्ण भारतीय इतिहास और ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों को विश्वविद्यालय परिसरों में चयनित दीवारों पर प्रदर्शित किया जाए। साथ ही विद्यार्थियों और अध्यापकों के बीच संवाद को बढ़ावा देने के लिए सप्ताह में एक बार या महीने में दो बार ‘विद्यार्थी–अध्यापक संवाद’ की पहल शुरू की जाए, क्योंकि शिक्षा में संवाद अत्यंत आवश्यक है।

राज्यपाल बागड़े ने विश्वविद्यालयों द्वारा गांव गोद लेकर उनके विकास में योगदान देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि गांवों में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने, गरीबी दूर करने और कौशल विकास से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ करने में विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका होनी चाहिए, विशेषकर तकनीकी विश्वविद्यालय इस दिशा में आगे आएं।

उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि नेक रैंकिंग के अंतर्गत विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती के लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं। उन्होंने कहा कि रिक्त पदों का रोस्टर बनाकर उन्हें भरने की कार्यवाही जल्द की जाएगी। विश्वविद्यालयों में पेंशन और अन्य आवश्यक सुविधाओं, भवन आदि के लिए उन्होंने  मुख्यमंत्री स्तर पर चर्चा कर सकारात्मक कार्यवाहीं किए जाने का विश्वास दिलाया।

उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव कुलदीप रांका ने भारत सरकार के स्तर पर  विश्वविद्यालयों के विकास के लिए बनी समिति के निर्णयों के बारे में विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने विश्वविद्यालयों में ग्लोबल टेलेंट रिटर्न स्कीम, प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस, विश्वविद्यालयों में रिक्त पद भरने, कौशल विकास  के बारे में की जा रही कार्यवाही के बारे में जानकारी दी। उन्होंने राज्य सरकार स्तर पर रिक्तियों को भरने के लिए रोस्टर प्रणाली और इस सम्बन्ध में दी गई स्वीकृतियां के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने विश्वविद्यालय के अंतर्गत पैंशन फंड के लिए कार्य करने और विश्वविद्यालय व्यय कम किए जाने पर जोर दिया।

आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा पद्धति  विभाग के प्रमुख सचिव सुबीर कुमार ने विश्वविद्यालयों को राजस्व सृजित किए जाने पर जोर दिया। पशुपालन विभाग के सचिव  डॉ. समित शर्मा,  वित्त विभाग की  सचिव श्रीमती टीना सोनी, चिकित्सा शिक्षा विभाग के ललित कुमार,  समाज कल्याण विभाग के आयुक्त इकबाल खान ने भी विचार रखे।




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