



नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल गया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन अब औपचारिक रूप से भाजपा के 12 वें राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। सोमवार को दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी की गई। 45 वर्षीय नितिन नबीन इस पद पर पहुंचने वाले भाजपा के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड अमित शाह के नाम था, जो 49 वर्ष की उम्र में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे।
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मण ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए केवल नितिन नबीन का ही नाम प्रस्तावित किया गया है। उनके समर्थन में कुल 37 सेट नामांकन पत्र दाखिल किए गए, जिनकी विधिवत जांच की गई। जांच के दौरान सभी नामांकन पत्र वैध पाए गए। इसके बाद नितिन नबीन के नाम का औपचारिक ऐलान किया जाएगा।
नामांकन के दौरान पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की मजबूत मौजूदगी देखने को मिली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, नितिन गडकरी सहित देशभर के मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं ने नितिन नबीन के समर्थन में नामांकन पत्र दाखिल किए। इससे यह स्पष्ट हो गया कि नितिन नबीन को पार्टी के भीतर व्यापक समर्थन प्राप्त है।

राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मण ने बताया कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया पार्टी के संगठनात्मक संविधान के तहत पूरी की गई है। देश के 36 में से 30 राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों के चुनाव पूरे होने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू की गई, जो आवश्यक 50 प्रतिशत से अधिक है। कुल 37 नामांकन सेटों में से 36 सेट अलग-अलग राज्यों से प्राप्त हुए, जिनमें प्रत्येक सेट पर 20 नेताओं के हस्ताक्षर थे। इसके अलावा एक अलग नामांकन सेट भाजपा के संसदीय बोर्ड की ओर से प्रस्तुत किया गया, जिस पर प्रधानमंत्री सहित 37 सांसदों के हस्ताक्षर दर्ज थे।
भाजपा के इतिहास में अब तक 11 नेता राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। इनमें लालकृष्ण आडवाणी तीन बार पार्टी अध्यक्ष बने, जबकि राजनाथ सिंह ने दो बार यह जिम्मेदारी निभाई। नितिन नबीन अब इस सूची में सबसे कम उम्र में राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने वाले नेता के रूप में शामिल हो गए हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव पार्टी की राष्ट्रीय परिषद करती है, जिसमें लगभग 5,708 सदस्य शामिल होते हैं। हालांकि, इस बार केवल एक ही नामांकन होने के कारण मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी।