Monday, 19 January 2026

हार के डर से भाजपा ने राजस्थान में ‘नाम काटो’ साजिश रची: नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली


हार के डर से भाजपा ने राजस्थान में ‘नाम काटो’ साजिश रची: नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली

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जयपुर। राजस्थान में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पार्टी आगामी चुनावों में हार के डर से प्रदेशभर में सुनियोजित तरीके से “वोटर लिस्ट मैनिपुलेशन” कर रही है। जूली ने कहा कि कोटा से जोधपुर, डीडवाना से अलवर तक भाजपा द्वारा ‘नाम काटो’ अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत एक विशेष वर्ग और कांग्रेस समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश रची जा रही है।

जूली ने रामगढ़ (अलवर) का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां एक ही दिन में भाजपा के बूथ लेवल एजेंट (BLA) के नाम से 1383 फर्जी आपत्तियां दाखिल की गईं, जिनमें बीएलए के फर्जी हस्ताक्षर तक किए गए। इन आपत्तियों में कई जीवित मतदाताओं को मृत बताया गया और महिलाओं के खिलाफ चरित्र हनन जैसे आपत्तिजनक कारण तक दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि यही पैटर्न अलवर ग्रामीण, सरदारपुरा, डीडवाना और कोटा में भी अपनाया जा रहा है।

नेता प्रतिपक्ष ने इसे महज संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित प्रयोग करार दिया। उन्होंने कहा कि रामगढ़, अलवर ग्रामीण और कोटा के आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि यह पूरी तरह से योजनाबद्ध अपराध है, जो कूटरचित दस्तावेजों (Forgery) और धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। जूली ने कहा कि SIR की आड़ में हजारों संदिग्ध आपत्तियां लगवाकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।

जूली ने बताया कि राजस्थान में SIR के तहत दावे और आपत्तियां पेश करने का आज अंतिम दिन है। आंकड़ों के अनुसार भाजपा के 2133 बीएलए ने नाम हटवाने के लिए 18,896 फॉर्म दिए हैं, जबकि नाम जोड़ने के लिए केवल 291 फॉर्म दाखिल किए गए। इसके विपरीत कांग्रेस के 110 बीएलए ने नाम हटवाने के लिए सिर्फ 2 फॉर्म और नाम जोड़ने के लिए 185 फॉर्म दिए हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि 9 जनवरी तक भाजपा ने नाम हटवाने के लिए केवल 4 फॉर्म दिए थे, लेकिन 16 जनवरी तक अचानक यह संख्या बढ़कर 18,896 कैसे हो गई। अचानक हजारों फॉर्म जमा होने पर कांग्रेस ने गंभीर गड़बड़ी की आशंका जताई है। जूली ने यह भी कहा कि दावे-आपत्तियों की अंतिम तिथि पहले 15 जनवरी थी, जिसे बढ़ाकर 19 जनवरी किया गया। कांग्रेस ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग पर भाजपा से मिलीभगत का आरोप लगाया है।

जूली ने बताया कि इस पूरे विवाद की शुरुआत 14 जनवरी से हुई, जब कांग्रेस ने अचानक हजारों नाम हटवाने के फॉर्म और फर्जीवाड़े का मुद्दा उठाया। इसके बाद 15 जनवरी को कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और भाजपा पर अफसरों पर दबाव बनाकर एक साथ हजारों फॉर्म जमा करवाने का आरोप लगाया।

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