



नई दिल्ली। राजस्थान में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत नाम जोड़ने और हटाने को लेकर उठा विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला बताते हुए दिल्ली स्थित AICC मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भारतीय जनता पार्टी पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े के आरोप लगाए हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि 3 जनवरी तक SIR प्रक्रिया सामान्य रूप से चल रही थी, लेकिन उसी दिन भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष की जयपुर में हुई बैठक के बाद पूरा खेल शुरू हुआ। उस बैठक में एजेंडा तय हुआ और इसके बाद फर्जी तरीके से वोट जोड़ने और काटने की साजिश रची गई।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा ने आरोप लगाया कि 3 से 13 जनवरी के बीच भाजपा ने पूरी प्रक्रिया को गुप्त रूप से अंजाम दिया। इस दौरान हर विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से फर्जी कंप्यूटराइज्ड फॉर्म प्रिंट किए गए और भाजपा विधायकों व उम्मीदवारों को पेन ड्राइव देकर हजारों की संख्या में दावे-आपत्तियां दाखिल करवाई गईं। 13 जनवरी की शाम से 15 जनवरी तक कई विधानसभा क्षेत्रों में 10 हजार से 20 हजार तक नाम काटने के फॉर्म जमा करवाए गए। खासतौर पर उन क्षेत्रों को चिन्हित किया गया, जहां कांग्रेस चुनाव जीती थी और एक वर्ग विशेष के मतदाताओं के नाम हटाने के प्रयास किए गए।
उन्होंने कहा कि उनके स्वयं के विधानसभा क्षेत्र में 2 हजार से ज्यादा फर्जी फॉर्म ले जाए गए, लेकिन एसडीएम ने उन्हें लेने से मना कर दिया। कई जगह बीएलए (Booth Level Agent) के फर्जी हस्ताक्षर कर फॉर्म जमा करवाए गए, जिसकी पुष्टि खुद बीएलए ने की है। डोटासरा ने बताया कि 15 जनवरी को कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से शिकायत की थी कि मंत्री स्तर तक से एसडीएम पर दबाव डाला जा रहा है, लेकिन आश्वासन के बावजूद भाजपा ने 15 जनवरी तक करीब 1 लाख 40 हजार फॉर्म रजिस्टर करवा दिए।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा ने कहा कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी के बल्क में फॉर्म नहीं लेने के स्पष्ट आदेशों के बावजूद झुंझुनूं में 13,882, मंडावा में 16,276 और खेतड़ी में 1,478 फॉर्म लिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेता बीएलओ से ओटीपी मांग रहे हैं, ताकि फर्जी नाम जोड़े जा सकें और कांग्रेसी विचारधारा वाले मतदाताओं के नाम काटे जा सकें। डोटासरा ने दावा किया कि वे इसके सबूत देने को तैयार हैं।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा ने कहा कि चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार ड्राफ्ट रोल से पहले एक बीएलए रोजाना 50 और ड्राफ्ट रोल के बाद केवल 10 फॉर्म ही जमा कर सकता है। इसके बावजूद भाजपा नेताओं ने 13 जनवरी की बैठक में बल्क में फॉर्म जमा करने की छूट मांगने की कोशिश की, जिसे मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने खारिज कर दिया था। इसके बावजूद बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा कर हजारों फॉर्म जमा करवाए गए। डोटासरा ने आरोप लगाया कि बीएल संतोष और अमित शाह की जयपुर बैठकों के बाद ही SIR में फर्जीवाड़े का एजेंडा तय हुआ और राजस्थान में वोट पर डाका डालने की साजिश रची गई।
राजस्थान में SIR की प्रक्रिया के बाद जो ड्राफ्ट लिस्ट जारी हुई, इसमें 45 लाख लोग Absent, Shifted, Death पाए गए। इसके बाद 15 जनवरी तक ऑब्जेक्शन मांगे गए।
— Congress (@INCIndia) January 19, 2026
3 तारीख तक कोई अफरा-तफरी नहीं थी और सारा सिस्टम सही तरीके से चल रहा था।
मगर 3 तारीख को BJP के संगठन महासचिव बी.एल. संतोष… pic.twitter.com/wbAljicLSZ