



ब्लूवन इंक द्वारा प्रस्तुत जयपुर बुकमार्क 2026 के तीसरे दिन प्रकाशन, साहित्य और रचनात्मकता से जुड़े सत्रों की एक समृद्ध और विचारोत्तेजक श्रृंखला देखने को मिली। क्षेत्रीय भाषाओं को केंद्र में लाने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस दिन का विशेष फोकस मराठी प्रकाशन जगत पर रहा। महोत्सव के तीसरे दिन लेखकों, साहित्यिक एजेंटों और प्रकाशन उद्योग के विशेषज्ञों ने पुस्तकों और कहानी कहने की बदलती दुनिया पर गहन संवाद किया, जिससे भारतीय और वैश्विक प्रकाशन परिदृश्य के कई नए पहलू सामने आए।
दिन की शुरुआत ‘लाइव लाइन्स: इंडिया–यू.के. पब्लिशिंग फेलोज़ कनेक्ट’ सत्र से हुई, जिसमें हैरिएट हिर्शमैन और रूबी हेम्ब्रम ने हेमा सिंह रैंस के साथ संवाद किया। इस सत्र में भारत और यूके में स्वतंत्र प्रकाशन के अनुभवों, चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा हुई। इंडिया–यू.के. पब्लिशिंग फेलोशिप कार्यक्रम की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि यह पहल स्वतंत्र प्रकाशकों को प्रशिक्षण, नेटवर्किंग और जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल व लंदन बुक फेयर जैसे मंचों से जोड़ती है। रूबी हेम्ब्रम ने अपने प्रकाशन संस्थान आदिवाणी के माध्यम से आदिवासी इतिहास और मौखिक परंपराओं को पुस्तक रूप देने की यात्रा साझा की, जबकि हैरिएट हिर्शमैन ने स्वतंत्र प्रकाशन में रचनात्मक स्वतंत्रता और जोखिम उठाने की क्षमता को इसकी सबसे बड़ी ताकत बताया।
इसके बाद ‘ऑप्टिमिज़्म इन द टाइम्स ऑफ़ चेंज: मैपिंग द फ़्यूचर फ़ॉर बिग पब्लिशर्स’ सत्र में हार्परकॉलीन्स इंडिया के सीईओ अनंत पद्मनाभन और ई-कॉमर्स व एआई विशेषज्ञ श्रेया पुंज ने भारतीय प्रकाशन के भविष्य पर विचार रखे। श्रेया पुंज ने कहा कि पढ़ना कोई दायित्व नहीं, बल्कि एक आदत और लत है, जबकि अनंत पद्मनाभन ने बताया कि किस तरह एआई और इंटरनेट ने रिटेल, पाइरेसी और क्यूरेशन जैसे क्षेत्रों को बदला है। इसी सत्र में ‘ईयर ऑफ़ रीडिंग फ़ॉर प्लेज़र 2026’ पहल का अनावरण किया गया, जिसका उद्देश्य पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देना है।
‘नॉर्दर्न लाइट्स: चिल्ड्रेंस लिटरेचर फ्रॉम नार्वे’ सत्र में ओलिवर मॉयस्टैड और ट्रूडा स्प्राइट ने नॉर्वे के बाल साहित्य और सरकारी सहयोग की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि किस तरह राज्य द्वारा पुस्तकों की खरीद और पुस्तकालयों में वितरण से भाषा और पाठकवर्ग दोनों को मजबूती मिलती है।
इसके बाद पॉपुलर प्रकाशन की 100 वर्षों की विरासत पर आधारित संवाद में प्रकाशक हर्ष भटकल और राजनेता अनिश गावंडे ने भारत के ऐतिहासिक दौरों—विश्व युद्ध, स्वतंत्रता संग्राम और आपातकाल—में इस प्रकाशन की भूमिका पर प्रकाश डाला। चर्चा में यह भी सामने आया कि पॉपुलर प्रकाशन ने सिद्धांतों से समझौता किए बिना विचारों की स्वतंत्रता को कायम रखा।
‘ऑथर्स एंड एजेंट्स: द डेलिकेट बैलेंस ऑफ़ एक्सपेक्टेशंस’ सत्र में लेखकों और एजेंटों ने रचनात्मकता और व्यावसायिक अपेक्षाओं के बीच संतुलन पर चर्चा की। वहीं, मराठी प्रकाशन जगत के दिग्गजों ने मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने के महत्व, उसकी विरासत और भविष्य की संभावनाओं पर विचार साझा किए।
दिन का समापन ‘मार्केटिंग राउंडटेबल: द हब एंड द स्पोक्स इन द व्हील’ सत्र के साथ हुआ, जिसमें एआई, डेटा विश्लेषण और मार्केटिंग में तकनीक की भूमिका पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक के बावजूद बुकस्टोर्स में मानवीय क्यूरेशन और चयन की अहमियत बनी हुई है, खासकर नए पाठकों के लिए।
ब्लूवन इंक प्रस्तुत जयपुर बुकमार्क का चौथा दिन भी विविध और अंतरराष्ट्रीय संवादों से भरपूर रहने वाला है, जिसमें फ्रेंच, जापानी और वैश्विक प्रकाशन जगत से जुड़े सत्र शामिल होंगे।