



जयपुर। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में आयोजित प्री-बजट बैठक में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरकार के सामने गंभीर चिंता जताते हुए हर संभाग मुख्यालय पर कैंसर यूनिट स्थापित करने की मांग की। विशेषज्ञों ने बताया कि प्रदेश में महिलाओं में सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण करीब 50 प्रतिशत मरीजों की मृत्यु हो रही है। ऐसे में यदि कैंसर का इलाज संभाग स्तर पर उपलब्ध हो, तो महिलाओं को समय पर और नजदीक उपचार मिल सकेगा। फिलहाल प्रदेश के अधिकांश मरीजों को इलाज के लिए जयपुर या अन्य राज्यों का रुख करना पड़ता है।
बैठक में विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया कि कोरोना की तरह सर्वाइकल कैंसर की वैक्सीन को प्रदेश में व्यापक स्तर पर लागू किया जाए। डॉ. विनीता पाटनी ने बताया कि देश में हर दिन करीब 200 महिलाओं की मौत सर्वाइकल कैंसर से हो रही है, यानी हर 8 मिनट में एक महिला इस बीमारी का शिकार हो रही है। उन्होंने कहा कि यह कैंसर एक साधारण वैक्सीन से रोका जा सकता है, इसलिए महिलाओं और किशोरियों को सर्वाइकल वैक्सीन उपलब्ध कराना समय की जरूरत है।
बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा संवेदना से जुड़ा क्षेत्र है और राज्य सरकार इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया है, जिससे गांव-ढाणी तक गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क इलाज उपलब्ध हो रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आगामी बजट में भी स्वास्थ्य के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं रखी जाएगी। बजट पूर्व संवाद का उद्देश्य विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर ऐसा बजट तैयार करना है, जिससे प्रदेश की 8 करोड़ से अधिक जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलें और राजस्थान स्वास्थ्य के क्षेत्र में अग्रणी बने।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 7 नए मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं और 15 निर्माणाधीन हैं। भीलवाड़ा, धौलपुर, प्रतापगढ़, नाथद्वारा और बूंदी में नर्सिंग कॉलेज स्थापित किए गए हैं। निचले स्तर तक सेवाएं मजबूत करने के लिए 8,700 चिकित्सा संस्थानों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर में परिवर्तित किया गया है और 412 शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हैं। बालोतरा में नवीन जिला आयुर्वेद चिकित्सालय तथा ब्यावर, दूदू, डीग, डीडवाना–कुचामन और अनूपगढ़ में जिला आयुष चिकित्सालय शुरू किए गए हैं।
बैठक में उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव सीएमओ अखिल अरोरा, प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़, प्रमुख शासन सचिव वित्त वैभव गालरिया सहित यूनिसेफ, आईएमए राजस्थान, एसएमएस मेडिकल कॉलेज, आरयूएचएस और विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने सभी सुझावों को आगामी बजट में शामिल करने का आश्वासन दिया।