



सीतापुरा स्थित जयपुर एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर (जेईसीसी) में आयोजित राजस्थान डिजिफेस्ट–टाई ग्लोबल समिट 2026 के दूसरे दिन सोमवार को मुख्य हॉल में आयोजित फायरसाइड चैट में पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग का सत्र दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। ‘नो फियर, नो लिमिट्स: लेसन्स फ्रॉम द वर्ल्ड्स मोस्ट एग्रेसिव ओपनर’ विषय पर आयोजित इस संवाद में सहवाग ने क्रिकेट, स्टार्ट-अप, निवेश, नेतृत्व, टीमवर्क और जोखिम प्रबंधन से जुड़े अपने जीवन के अनुभव साझा किए।
टाई ग्लोबल के कन्वीनर महावीर प्रताप शर्मा से संवाद करते हुए सहवाग ने कहा कि साहस और आक्रामक सोच के बिना न तो खेल में और न ही जीवन में बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल सही पहचान, मार्गदर्शन और अवसर देने की है। उन्होंने जोखिम को सफलता का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि चाहे क्रिकेट हो, स्टार्ट-अप हो या निवेश—जोखिम समझदारी और संतुलन के साथ लेना जरूरी है।
इंडिया–पाकिस्तान मैचों से जुड़े यादगार किस्से साझा किए
फायरसाइड चैट के दौरान सहवाग ने इंडिया–पाकिस्तान मैचों से जुड़े रोचक किस्से भी साझा किए। उन्होंने बताया कि उनका पहला अंतरराष्ट्रीय मैच पाकिस्तान के खिलाफ था और उस दौरान उन्हें काफी कुछ सुनने को मिला था। तभी उन्होंने मन में ठान लिया था कि जब भी दोबारा पाकिस्तान के खिलाफ खेलने का मौका मिलेगा, तो मैदान पर ही जवाब देंगे।
सहवाग ने बताया कि यह मौका उन्हें वर्ष 2004 में मिला, जब मुल्तान टेस्ट में उन्होंने 309 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली और पहले सुनी गई बातों का जवाब बल्ले से दिया। उन्होंने कहा कि उस मैच में जब वे 228 रन पर नॉटआउट थे, तब शोएब अख्तर के साथ उनकी बहस हो गई थी। उसी दौरान उन्होंने मैदान पर कहा था—“बाप बाप होता है, बेटा बेटा होता है।” सहवाग ने बताया कि यह लाइन बाद में काफी मशहूर हो गई और आज भी इंडिया–पाकिस्तान मैचों के दौरान पाकिस्तान के खिलाड़ी और फैंस इस किस्से को दोहराते हैं।
टीमवर्क, नेतृत्व और कार्यस्थल संस्कृति पर जोर
सहवाग ने कहा कि किसी भी टीम या संगठन की सफलता विश्वास, सहयोग और सकारात्मक नेतृत्व पर निर्भर करती है। उन्होंने कार्यस्थल संस्कृति पर बोलते हुए कहा कि कंपनियों को अपने कर्मचारियों का ध्यान रखना चाहिए। आलोचना से घबराने के बजाय प्रदर्शन से जवाब देना ही सफलता की असली कुंजी है।
क्रिकेट, आईपीएल और भविष्य की संभावनाएं
आईपीएल के प्रभाव पर चर्चा करते हुए सहवाग ने कहा कि इसके बाद विदेशी खिलाड़ियों के नजरिये में सकारात्मक बदलाव आया है और स्लेजिंग जैसी प्रवृत्तियों में कमी आई है। उन्होंने कहा कि भारत का समय आ चुका है, हालांकि टेस्ट और वनडे क्रिकेट हमेशा मजबूत आधार बने रहेंगे। भविष्य को लेकर उन्होंने टी-20 के बाद टी-10 क्रिकेट की संभावनाओं की भी बात कही।
स्टार्ट-अप, निवेश और युवाओं को संदेश
स्टार्ट-अप और निवेश पर बोलते हुए सहवाग ने युवाओं को स्मार्ट बनने, सही निवेशक चुनने और सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्टार्ट-अप संस्कृति युवाओं को नवाचार और जोखिम उठाने का साहस देती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि क्रिकेट के अलावा हॉकी सहित अन्य खेलों में खिलाड़ियों को पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल पाती, इसलिए हर खेल में निवेश बढ़ना जरूरी है।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग सोमवार को जयपुर पहुंचे थे। डिजिफेस्ट टाई ग्लोबल समिट–2026 के मंच से क्रिकेट और एंटरप्रेन्योरशिप से जुड़े उनके अनुभव युवाओं, स्टार्ट-अप संस्थापकों और खेल प्रेमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने।