Thursday, 08 January 2026

सर्व ब्राह्मण महासभा की प्रदेश कार्यकारिणी बैठक में समाज सुधार के फैसले: विवाह में सादगी, दहेज-मुक्त परंपरा और संस्कारों की पुनर्स्थापना पर सर्वसम्मति


सर्व ब्राह्मण महासभा की प्रदेश कार्यकारिणी बैठक में समाज सुधार के फैसले: विवाह में सादगी, दहेज-मुक्त परंपरा और संस्कारों की पुनर्स्थापना पर सर्वसम्मति

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जयपुर में एम.आई. रोड स्थित चेम्बर भवन में आयोजित सर्व ब्राह्मण महासभा की प्रदेश कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक में समाज के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सुधार को लेकर कई ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए। बैठक में यह चिंता व्यक्त की गई कि वर्तमान समय में विवाह जैसे पवित्र संस्कार को दिखावे, प्रतिस्पर्धा और सुविधा-आधारित आयोजन बना दिया गया है, जिससे मध्यम और सामान्य वर्ग पर अनावश्यक आर्थिक व मानसिक दबाव बढ़ रहा है। इसी पृष्ठभूमि में महासभा ने समाज सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प लिया।

विवाह आयोजनों में भोजन विनियमन का निर्णय

प्रदेश कार्यकारिणी ने विवाह, सगाई, रिसेप्शन और अन्य मांगलिक आयोजनों में भोजन को मर्यादित, सीमित और सादा रखने का निर्णय लिया। तय व्यवस्था के अनुसार अधिकतम दो सब्ज़ियां, एक दाल या कढ़ी, एक प्रकार की रोटी/पूरी, एक प्रकार का चावल और दो मिठाइयां ही परोसी जाएंगी। चाट, आइसक्रीम और फास्ट-फूड काउंटर को सीमित या नगण्य रखने का आह्वान किया गया। महासभा का मानना है कि इससे फिजूलखर्ची पर रोक लगेगी और समाज में समानता व संतुलन बढ़ेगा।

विवाह विधि-विधान और मुहूर्त की अनिवार्यता

बैठक में स्पष्ट किया गया कि विवाह केवल सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सोलह संस्कारों में प्रमुख संस्कार है। इसलिए विवाह शुभ मुहूर्त और पंचांग के अनुसार ही संपन्न किए जाएं। गणेश पूजन, पाणिग्रहण, सप्तपदी, अग्नि परिक्रमा और मंगल फेरों सहित सभी प्रमुख विधियां शास्त्रसम्मत रूप से पूरी की जाएंगी। सुविधा या देर रात तक कार्यक्रम खींचने के कारण मुहूर्त भंग करने को संस्कारों के विरुद्ध बताया गया।

दहेज, दिखावे और अशोभनीय आयोजनों पर सख्त रुख

महासभा ने दहेज प्रथा के पूर्ण विरोध का संकल्प लेते हुए दहेज लेना-देना दोनों को सामाजिक अपराध माना। दहेज-मुक्त विवाह को सामाजिक सम्मान देने का निर्णय किया गया। साथ ही अत्यधिक सजावट, भव्य मंच, अनावश्यक लाइटिंग, अश्लील गीतों और अमर्यादित नृत्यों पर रोक लगाने पर सहमति बनी। समाज में “समाज क्या कहेगा” की मानसिकता के कारण होने वाली अनावश्यक प्रतिस्पर्धा और कर्ज लेकर खर्च करने की प्रवृत्ति का भी विरोध किया गया।

बुजुर्गों, मातृशक्ति और पुरोहित वर्ग का सम्मान

बैठक में यह भी तय किया गया कि विवाह और सामाजिक आयोजनों में बुजुर्गों, मातृशक्ति और पंडित–आचार्यों के सम्मान का विशेष ध्यान रखा जाएगा। निर्णय प्रक्रिया में उनके अनुभव और मार्गदर्शन को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि आयोजन गरिमामय और अनुशासित वातावरण में संपन्न हों।

समाज के नाम संदेश

प्रदेश कार्यकारिणी ने विश्वास जताया कि यदि ब्राह्मण समाज संगठित होकर इन नियमों को अपनाता है, तो अन्य समाज भी इसका अनुकरण करेंगे। महासभा के अनुसार इन निर्णयों से सामाजिक विकृतियों पर नियंत्रण, आर्थिक बोझ में कमी, बेटियों के विवाह का दबाव घटेगा और युवा पीढ़ी संस्कारों से जुड़ेगी।

बैठक की अध्यक्षता पं. सुरेश मिश्रा ने की। इस अवसर पर प्रदेश व जिला स्तर के पदाधिकारी, संगठन मंत्री और बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।


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