Wednesday, 07 January 2026

राजस्थान डिजिफेस्ट टाई ग्लोबल समिट–2026: रोजगार, युवा शक्ति और स्टार्टअप इकोसिस्टम पर मंथन, डेटा संप्रभुता के साथ एआई का उपयोग समय की मांग


राजस्थान डिजिफेस्ट टाई ग्लोबल समिट–2026: रोजगार, युवा शक्ति और स्टार्टअप इकोसिस्टम पर मंथन, डेटा संप्रभुता के साथ एआई का उपयोग समय की मांग

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जेईसीसी, सीतापुरा में आयोजित राजस्थान डिजिफेस्ट टाई ग्लोबल समिट–2026 के अंतर्गत सोमवार को मुग्धा हॉल में ‘एआई, यूथ एंड रिस्पॉन्सिबल सिटिजनशिप’ विषय पर एक महत्वपूर्ण सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के साथ एआई विशेषज्ञ अजय डाटा और एमआईटी के प्रोफेसर रमेश रासकर ने एआई के भविष्य, रोजगार के अवसरों, युवा शक्ति और स्टार्टअप इकोसिस्टम पर विस्तृत चर्चा की।

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि एक ऐसा टूल बन चुका है, जिसका उपयोग वर्तमान समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार एआई को अपनाने के मामले में वैश्विक स्तर के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है। हालांकि, एआई के उपयोग के साथ डेटा संप्रभुता, नागरिकों की निजता और राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है। एआई का उपयोग केवल राष्ट्रहित और सामाजिक विकास के उद्देश्य से ही किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राजस्थान ने नीतिगत समर्थन, संस्थागत सहयोग और मजबूत अवसंरचना के माध्यम से स्टार्टअप्स को सशक्त किया है। एआई के युग में स्टार्टअप्स को केवल एआई का उपभोक्ता नहीं, बल्कि एआई का निर्माता बनना होगा। इसके लिए राज्य में एआई ट्रेनिंग सेंटर, कौशल विकास कार्यक्रम और नवाचार आधारित इकोसिस्टम को और मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि राजस्थान डिजिफेस्ट–2026 इसी दिशा में राज्य सरकार का एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जो राजस्थान को एआई के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करेगा।

एमआईटी के प्रोफेसर रमेश रासकर ने डेटा संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारत को अपने स्वयं के एआई मॉडल और प्लेटफॉर्म विकसित करने की दिशा में तेजी से काम करना चाहिए। उन्होंने बताया कि राजस्थान सरकार इस दिशा में ‘मेरा एआई प्रोजेक्ट’ के माध्यम से आईटी विभाग के साथ मिलकर कार्य कर रही है, जो भविष्य में राज्य को एआई नवाचार का केंद्र बना सकता है। उन्होंने आईस्टार्ट पहल की सराहना करते हुए इसे देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक मजबूत मॉडल बताया।

एआई विशेषज्ञ अजय डाटा ने कहा कि एआई में सपनों को हकीकत में बदलने की अपार क्षमता है, लेकिन इसके लिए केवल एआई पाठ्यक्रम शुरू करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि लोगों को एआई एजेंट विकसित करने और उन्हें व्यावहारिक रूप से उपयोग में लाने का प्रशिक्षण देना समय की मांग है। ऐसे आयोजनों से युवाओं को सही दिशा और अवसर मिलेंगे।

सत्र के दौरान यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि एआई, युवा शक्ति और स्टार्टअप्स के समन्वय से ही भविष्य का समावेशी और सुरक्षित डिजिटल विकास संभव है।

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