



जयपुर। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि अब तक उन्होंने दो स्टार्टअप्स को प्रत्यक्ष रूप से गाइड किया है, जिनमें से एक स्टार्टअप आज करीब 200 करोड़ रुपये की वैल्यूएशन तक पहुंच चुका है। इससे उन्हें यह भरोसा मिला है कि सही समय पर दी गई मेंटरशिप किसी भी स्टार्टअप को सही दिशा देने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। स्मृति ईरानी जयपुर में आयोजित राजस्थान डिजिफेस्ट टाई ग्लोबल समिट 2026 के दूसरे दिन स्टार्टअप मेंटरशिप और सोशल इम्पैक्ट विषय पर अपने विचार रख रही थीं।
उन्होंने बताया कि दूसरा स्टार्टअप हेल्थ सेक्टर से जुड़ा है, जो बिल्कुल शुरुआती स्तर से खड़ा हुआ और भारत के उन शुरुआती स्टार्टअप्स में शामिल है, जिसमें बिल गेट्स ने अपनी निजी पूंजी से निवेश किया है। स्मृति ईरानी ने कहा कि यह इस बात का उदाहरण है कि यदि स्टार्टअप का उद्देश्य सामाजिक प्रभाव और स्थायी समाधान पर आधारित हो, तो वैश्विक स्तर के निवेशक भी उससे जुड़ने के लिए आगे आते हैं।
स्मृति ईरानी ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी ताकत अलग-अलग सेक्टरों, ट्रेड एसोसिएशनों और मार्केट संगठनों को एक साझा मंच पर लाकर साथ काम करवाना रही है। इस पहल में गेट्स फाउंडेशन का सहयोग मिल रहा है, वहीं टाटा ट्रस्ट्स से भी बातचीत चल रही है। इसके अलावा डेलॉयट इस प्रयास में नॉलेज पार्टनर के रूप में जुड़ा है। उन्होंने कहा कि अगर भारत को वैश्विक मंच पर आगे ले जाना है, तो केवल ‘सबका साथ, सबका विकास’ ही नहीं, बल्कि ‘सबका प्रयास’ भी जरूरी है, ताकि समाज और नीति मिलकर एक-दूसरे को सशक्त बना सकें।
स्मृति ईरानी ने स्पष्ट किया कि उनका काम केवल महिला उद्यमियों तक सीमित नहीं है। वे माइक्रो और स्मॉल बिजनेस को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही हैं, ताकि ये उद्यम भी वेंचर कैपिटल की दुनिया तक पहुंच सकें। उन्होंने बताया कि बीते डेढ़ साल में जिन स्टार्टअप्स को उन्होंने गाइड किया, उनमें से एक ने मात्र एक साल के भीतर नौ शहरों में अपना संचालन शुरू किया और 150 करोड़ रुपये से अधिक का जीएमवी (ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू) हासिल किया।
उन्होंने कहा कि सही मार्गदर्शन, नेटवर्किंग और नीति समर्थन मिलने पर भारत के स्टार्टअप्स न केवल आर्थिक विकास में योगदान दे सकते हैं, बल्कि सामाजिक बदलाव के भी बड़े वाहक बन सकते हैं।