Wednesday, 11 February 2026

भूपाल नोबल्स संस्थान के 104 वें स्थापना दिवस समारोह: शिक्षक ही समाज और राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा आधार: राजनाथ सिंह


भूपाल नोबल्स संस्थान के 104 वें स्थापना दिवस समारोह: शिक्षक ही समाज और राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा आधार: राजनाथ सिंह

उदयपुर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यदि सम्मान का सबसे बड़ा हकदार कोई है, तो वह शिक्षक है, क्योंकि वही व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करता है। उन्होंने कहा कि देश में अब तक जितने भी बड़े सामाजिक परिवर्तन हुए हैं, उनके मूल में शिक्षक ही रहे हैं। एक रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि शिक्षकों की इसी प्रतिष्ठा के कारण आज 54 प्रतिशत अभिभावक अपने बच्चों को शिक्षक बनते देखना चाहते हैं। वे शुक्रवार को उदयपुर में विद्या प्रचारिणी सभा भूपाल नोबल्स संस्थान के 104वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महाराणा भूपाल सिंह के शिक्षा और साक्षरता के क्षेत्र में किए गए योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने समाज को शिक्षित और जागरूक बनाने के लिए दूरदर्शी प्रयास किए। राजनाथ सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत के साथ परंपरागत ज्ञान और आधुनिक शिक्षा का संतुलित समन्वय प्रस्तुत करती है। इसका उद्देश्य ऐसी विचारशील, संवेदनशील और चरित्रवान पीढ़ी तैयार करना है, जो समाज की जटिल समस्याओं का समाधान कर सके।

शिक्षा भविष्य की पीढ़ियों की नींव

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज, राष्ट्र और भविष्य की पीढ़ियों के निर्माण का सशक्त आधार है। इससे पूर्व दोपहर 12.15 बजे बीएन संस्थान परिसर पहुंचने पर एनसीसी कैडेट्स ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके बाद उन्होंने महाराणा भूपाल सिंह की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि मनुष्य केवल शब्दों से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से विभूषित होता है। जीवन में सच्ची सफलता प्राप्त करने के लिए मन को अहंकार से मुक्त रखना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे जीवन में कभी अहंकार न रखें और संस्कारों व अनुशासन को अपना मार्गदर्शक बनाएं। उनका संदेश था कि सुदृढ़ चरित्र और अनुशासित जीवन ही व्यक्ति को ऊंचाइयों तक ले जाता है।

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