



राजस्थान में चर्चित पेपर लीक प्रकरण से जुड़े मामले में पूर्व आरपीएससी सदस्य बाबूलाल कटारा से एसओजी की पूछताछ में भले ही कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई हो, लेकिन प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। ईडी के समक्ष कटारा ने स्वीकार किया कि उसने आरपीएससी सदस्य बनने के लिए तत्कालीन डूंगरपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश खोड़निया से 1.20 करोड़ रुपए में सौदा किया था। इस सौदे के तहत खोड़निया के करीबी सहयोगी अशोक जैन को दो किस्तों में 40 लाख रुपए दिए गए। कटारा के अनुसार, यह रकम उसने विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के इंटरव्यू में अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ दिलाने के बदले हासिल की थी।
ईडी की पूछताछ में कटारा ने यह भी माना कि आरपीएससी की आरएएस, कृषि अधिकारी और कॉलेज लेक्चरर भर्ती के इंटरव्यू के दौरान अभ्यर्थियों से नकद राशि ली गई। हालांकि, उसने यह स्पष्ट नहीं किया कि कुल कितनी रकम वसूली गई। कटारा ने बताया कि अभ्यर्थी सीधे उसके संपर्क में नहीं आते थे, बल्कि जानकारों के माध्यम से संपर्क साधा जाता था।
कटारा ने यह भी दावा किया कि सदस्य पद के लिए सहमति देने के बाद खोड़निया ने उसे वित्तीय लाभ का आश्वासन दिया था और छह साल के कार्यकाल में हर साल 20 लाख रुपए देने की बात कही गई थी। हालांकि, उसने यह भी कहा कि अन्य विधायकों या जनप्रतिनिधियों ने उससे कोई राशि या लाभ नहीं लिया।
दिनेश खोड़निया ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कटारा द्वारा लगाए गए सभी आरोप गलत हैं। उनका कहना है कि उन्होंने न तो किसी की सिफारिश की और न ही किसी से पैसे लिए। ईडी की पूर्व कार्रवाई में जब्त 24 लाख रुपए भी उन्होंने कानूनी प्रक्रिया के जरिए रिलीज करवा लिए हैं और पूरा मामला अब स्पष्ट हो चुका है।
ईडी के अनुसार, कटारा की नियुक्ति और उसके लंबे प्रशासनिक करियर की भी जांच की जा रही है। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह 1987 में शिक्षक के रूप में सेवा में आया था और विभिन्न पदों पर रहते हुए 2020 में आरपीएससी सदस्य बना। अब ईडी इन बयानों और वित्तीय लेनदेन के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही है।