



जयपुर। नगर निकाय चुनाव में टिकट वितरण के बाद संभावित बगावत और कार्यकर्ताओं के विरोध को नियंत्रित करने के लिए भाजपा ने इस बार अलग रणनीति अपनाई है। पार्टी पार्षद प्रत्याशियों की सूची सार्वजनिक करने के बजाय अधिकृत उम्मीदवारों की जानकारी सीमित स्तर पर साझा करेगी। भाजपा प्रदेश कार्यालय की ओर से पार्टी सिंबल जिला प्रभारियों को सौंपे जाएंगे और वे सोमवार को सीधे रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के दफ्तर में सिंबल जमा करवाएंगे।
पार्टी का उद्देश्य है कि टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदारों को तत्काल बगावत का मौका न मिले और नामांकन प्रक्रिया भी बिना किसी तकनीकी त्रुटि के पूरी हो सके।
भाजपा ने प्रत्याशियों के नामांकन और पार्टी सिंबल से जुड़ी प्रक्रिया को सुरक्षित रखने के लिए अपनी लीगल सेल के अधिवक्ताओं के पैनल को अधिकृत करने की तैयारी की है। यह पैनल नामांकन पत्र, पार्टी की अधिकृत घोषणा, सिंबल संबंधी दस्तावेज और अन्य कानूनी औपचारिकताओं की जांच करेगा, ताकि किसी भी उम्मीदवार का नामांकन तकनीकी गलती के कारण प्रभावित न हो। पार्टी नेतृत्व निकाय चुनाव के अंतिम दिन किसी तरह की प्रक्रिया संबंधी चूक से बचना चाहता है।
बताया जा रहा है कि भाजपा की ओर से जिला प्रभारियों को पहले ही खाली सिंबल लेटर दिए जा चुके हैं। रविवार देर रात पार्टी अधिकृत ई-मेल के जरिए प्रत्याशियों की अंतिम सूची संबंधित जिला प्रभारियों को भेजेगी। इसके बाद अधिकृत नाम सिंबल लेटर पर भरकर पार्टी के अधिकृत पत्र के साथ रिटर्निंग ऑफिसर के पास जमा कराए जाएंगे। जिला अध्यक्ष और संबंधित विधायक को भी प्रत्याशी के नाम की सूचना दी जाएगी। इसके बाद स्थानीय स्तर पर उम्मीदवार को टिकट फाइनल होने की जानकारी दी जाएगी।
भाजपा की यह रणनीति सीधे तौर पर टिकट से नाराज नेताओं की संभावित बगावत को रोकने से जुड़ी मानी जा रही है। यदि पूरी सूची पहले सार्वजनिक कर दी जाती है तो टिकट नहीं मिलने वाले दावेदार निर्दलीय या दूसरे दल के टिकट पर नामांकन करने का प्रयास कर सकते हैं। इसलिए पार्टी अंतिम समय तक नामों को सीमित दायरे में रखने की रणनीति पर काम कर रही है। नामांकन की समयसीमा पूरी होने के बाद ही अधिकृत उम्मीदवारों की तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।
रविवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों को लेकर टिकट मंथन कई दौर में चला।बैठक के दौरान कई बार विवाद की स्थिति बनी और जयपुर की बैठक को तीन बार स्थगित करना पड़ा। कई विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र के वार्डों के लिए एक-एक नाम का पैनल लेकर पहुंचे और उसी नाम पर टिकट फाइनल करने पर जोर देते रहे। दूसरी ओर पार्टी के सर्वे और संगठन प्रभारियों की ओर से कुछ वार्डों में दूसरे नाम सामने रखे गए। इसी कारण कई सीटों पर सर्वसम्मति बनना मुश्किल हो गया।
बैठक के दौरान जयपुर के दो विधायक अपने क्षेत्र के अधिकांश वार्डों के लिए एकल नाम लेकर पहुंचे। जबकि पार्टी के आंतरिक सर्वे, स्थानीय संगठन और प्रभारियों की रिपोर्ट में कई जगह अलग दावेदारों के नाम सामने आए थे। इससे टिकट चयन को लेकर मतभेद उभर गए।संगठन का मानना था कि हर वार्ड में एक से अधिक नामों पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि केवल विधायक की पसंद के बजाय जीत की संभावना और संगठनात्मक फीडबैक को भी महत्व दिया जा सके।
कई वार्डों में स्थानीय विधायक, संगठन प्रभारी और पार्टी सर्वे की राय अलग-अलग होने के कारण रविवार देर रात तक प्रत्याशियों के नामों पर गतिरोध बना रहा। पार्टी नेतृत्व ने अलग-अलग स्तर से मिले फीडबैक को मिलाकर अंतिम नाम तय करने की प्रक्रिया जारी रखी। अब सोमवार को जिला प्रभारी अधिकृत सिंबल के साथ रिटर्निंग ऑफिसर के पास पहुंचेंगे। इसके बाद साफ होगा कि भाजपा ने जयपुर समेत प्रदेश के अलग-अलग निकायों में किन चेहरों पर दांव लगाया है।