



नागपुर। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के एक बयान ने महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है। गडकरी ने कहा कि अब वे पहले जितना काम नहीं कर पा रहे हैं और जिम्मेदारियां नई पीढ़ी के हाथों में सौंपी जानी चाहिए।
गडकरी ने यह बात नागपुर में आयोजित ‘एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण वर्ग’ के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। उनके इस बयान को राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर संभावित पीढ़ीगत बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समय के साथ जिम्मेदारियां युवाओं को मिलनी चाहिए, ताकि वे आगे आकर नेतृत्व संभाल सकें।
गडकरी की टिप्पणी के बाद राजनीतिक गलियारों में इसके मायने निकाले जाने लगे हैं। हालांकि उनके बयान को किसी पद छोड़ने या तत्काल राजनीतिक फैसले की औपचारिक घोषणा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
गडकरी का बयान ऐसे समय सामने आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की भविष्य की राजनीतिक भूमिका को लेकर भी अटकलें लगाई जाती रही हैं।
इसी वजह से गडकरी के नई पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपने वाले बयान को राजनीतिक और संगठनात्मक बदलाव की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि इसे लेकर भाजपा की ओर से किसी बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
अपने संबोधन के दौरान गडकरी ने राजनीति के साथ अपनी निजी जीवनशैली को लेकर भी दिलचस्प किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि युवावस्था में उनकी दिनचर्या काफी अनियंत्रित हुआ करती थी।
गडकरी ने कहा कि पार्टी का काम करते समय कई बार शाम को समोसा खाकर ही सो जाते थे। कोविड के बाद उन्होंने अपनी सेहत को लेकर ज्यादा गंभीरता बरतना शुरू किया।
गडकरी ने युवाओं को स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की सलाह भी दी। उन्होंने बताया कि अब वे रोज सुबह करीब ढाई घंटे एक्सरसाइज और प्राणायाम करते हैं तथा ट्रेनर की देखरेख में वर्कआउट करते हैं।
उन्होंने युवाओं से कहा कि वे भी प्रतिदिन कम से कम आधा घंटा व्यायाम और प्राणायाम के लिए जरूर निकालें। गडकरी ने अपने अनुभव के जरिए संदेश दिया कि सार्वजनिक और व्यस्त जीवन के बीच स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।