



जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर में 22 गोदाम रेलवे लाइन से बी-2 बाइपास तक करीब 310 चिह्नित अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने सोमवार को सीताराम देवंदा एवं अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) को चार महीने के भीतर कार्रवाई पूरी करने को कहा।
हाईकोर्ट ने साथ ही निर्देश दिया कि 25 नवंबर को जेडीए सचिव पालना रिपोर्ट के साथ व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हों।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अतिक्रमण हटाने से पहले प्रभावित लोगों को 15 दिन का नोटिस दिया जाए और उन्हें अपनी बात रखने का उचित अवसर भी मिले।
इसके बाद जेडीए नियमानुसार कार्रवाई कर अतिक्रमण हटाए। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि कार्रवाई केवल निजी व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहेगी।
सुनवाई के दौरान मध्यस्थ पक्ष के वकील ने अदालत को बताया कि सड़क के कुछ हिस्सों पर रेलवे अधिकारियों की ओर से भी अतिक्रमण किया गया है।
इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि यदि सड़क की निर्धारित सीमा में किसी निजी व्यक्ति, संस्था या किसी वैधानिक प्राधिकरण का अतिक्रमण पाया जाता है, तो उसे भी हटाया जाए।
इस निर्देश के बाद अब कार्रवाई का दायरा केवल आम कब्जाधारियों तक सीमित नहीं रहेगा।
जेडीए ने अदालत में शपथ पत्र पेश कर सड़क की निर्धारित चौड़ाई की जानकारी दी थी। जेडीए की 62वीं बैठक में सड़क की आधिकारिक चौड़ाई स्पष्ट की गई थी।
इसके अनुसार—
22 गोदाम रेलवे स्टेशन से महेश नगर फाटक तक: 40 फीट
महेश नगर फाटक से गोपालपुरा बाइपास तक: 60 फीट
गोपालपुरा बाइपास से B-2 बाइपास तक: 80 फीट
इसी निर्धारित चौड़ाई के आधार पर अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं।
मामले में करीब 310 अतिक्रमणों की पहचान की गई है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब जेडीए को चरणबद्ध तरीके से नोटिस, सुनवाई और फिर हटाने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
यह कार्रवाई पूरी होने के बाद संबंधित सड़क पर यातायात व्यवस्था और सड़क की वास्तविक चौड़ाई बहाल होने की उम्मीद है।
हाईकोर्ट ने जेडीए सचिव को 25 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर यह बताने को कहा है कि आदेश की पालना में अब तक क्या कार्रवाई की गई।
ऐसे में आने वाले महीनों में जेडीए को केवल नोटिस जारी करने तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि मौके पर वास्तविक कार्रवाई की प्रगति भी अदालत के सामने रखनी होगी।