



जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने मानसरोवर स्थित पत्रकार कॉलोनी के सामुदायिक भवन को सुविधायुक्त बनाने के मामले में जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) को 8 सप्ताह का समय दिया है। हाईकोर्ट में 21 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान जेडीए की ओर से बताया गया कि सामुदायिक भवन के मरम्मत एवं नवीनीकरण के लिए सांवरिया जी कंस्ट्रक्शन कंपनी को 10 लाख 33 हजार 679 रुपए का वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है।
जेडीए ने अदालत से कहा कि कार्य टेंडर की शर्तों और निर्धारित समयसीमा के अनुसार पूरा किया जाना है, इसलिए आवश्यक समय दिया जाए। इस पर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जेडीए को 8 सप्ताह में कार्य पूरा कर प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति इंद्रजीत सिंह और न्यायमूर्ति संदीप तनेजा की खंडपीठ ने वरिष्ठ पत्रकार श्यामसुंदर शर्मा की जनहित याचिका पर की।
अदालत के समक्ष जेडीए की ओर से बताया गया कि सामुदायिक भवन को सुविधायुक्त बनाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और संबंधित निर्माण एजेंसी को वर्क ऑर्डर जारी हो चुका है।
इसके बाद अदालत ने जेडीए को कार्य पूरा करने के लिए 8 सप्ताह का समय दिया और निर्देश दिया कि निर्धारित अवधि में हुए काम की स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की जाए।
जेडीए की ओर से अधिवक्ता अमित कुड़ी ने अदालत को बताया कि कोर्ट के निर्देशों की पालना में जयपुर विकास प्राधिकरण ने सांवरिया जी कंस्ट्रक्शन कंपनी को ₹10,33,679 का वर्क ऑर्डर जारी कर दिया है।
उन्होंने कहा कि मानसरोवर स्थित पत्रकार कॉलोनी के सामुदायिक भवन में आवश्यक मरम्मत और नवीनीकरण का काम पूरा कर इसे सुविधायुक्त बनाया जाएगा।
जनहित याचिकाकर्ता वरिष्ठ पत्रकार श्यामसुंदर शर्मा की ओर से अधिवक्ता तपिश सारस्वत, निधि और नमन यादव ने अदालत के समक्ष कहा कि हाईकोर्ट पहले भी जेडीए को सामुदायिक भवन में आवश्यक सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दे चुका है।
याचिकाकर्ता पक्ष ने कहा कि कोर्ट के समक्ष वर्क ऑर्डर की प्रति तो पेश की गई है और यह भी कहा गया कि काम शुरू हो चुका है, लेकिन मौके पर वास्तविक निर्माण कार्य अभी दिखाई नहीं दे रहा।
अधिवक्ताओं ने अदालत से आग्रह किया कि जेडीए को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि कार्य समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा कराया जाए, ताकि सामुदायिक भवन की सुविधाओं का लाभ स्थानीय निवासियों और आमजन को मिल सके।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब जेडीए को निर्धारित समयसीमा में सामुदायिक भवन के नवीनीकरण का काम आगे बढ़ाना होगा और उसकी वास्तविक प्रगति अदालत के सामने रखनी होगी।
यह मामला अब केवल वर्क ऑर्डर जारी करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जेडीए को यह भी दिखाना होगा कि मौके पर काम कितना हुआ और किस स्तर तक भवन को सुविधायुक्त बनाया गया।

