



चोमू। जयपुर जिले के चोमू शहर की अशोक विहार कॉलोनी में बंदरों के आतंक से लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रोजाना सुबह करीब 5 से 7 बजे के बीच लाल मुंह वाले बंदरों का बड़ा झुंड कॉलोनी की एक गली से दूसरी गली, एक पेड़ से दूसरे पेड़ और एक मकान से दूसरे मकान तक उछल-कूद करता दिखाई देता है। इस दौरान पूरे इलाके में ऐसा माहौल बन जाता है, मानो कर्फ्यू लगा हो।
कॉलोनीवासियों के अनुसार सुबह के इन दो घंटों में लोग घर से बाहर निकलने से पहले पड़ोसियों से पूछते हैं कि बंदरों का झुंड निकल चुका है या नहीं। कई लोग घरों में लाठी-डंडे लेकर अपनी सुरक्षा करते हैं और खिड़की-दरवाजे बंद रखना ही बेहतर समझते हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि बंदरों के भय के कारण सुबह भोलेनाथ मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी कम हो गई है। बच्चों को स्कूल छोड़ने, दूध-सब्जी लेने या अन्य रोजमर्रा के काम भी लोग या तो बंदरों के आने से पहले पूरा करने की कोशिश करते हैं या फिर उनके निकल जाने का इंतजार करते हैं। लोगों का कहना है कि बंदरों का झुंड जब कॉलोनी में सक्रिय रहता है तो बाहर निकलना जोखिम भरा हो जाता है।
कॉलोनीवासियों का आरोप है कि थोड़ी सी चूक होते ही बंदर घरों में घुस जाते हैं। रसोई से खाने-पीने का सामान उठा ले जाना, कपड़े खींचकर फाड़ देना और घर के अन्य सामान को नुकसान पहुंचाना आम समस्या बन गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार दोपहिया वाहनों को गिराना और कारों पर कूदना भी लगातार हो रहा है। उन्हें भगाने की कोशिश करने पर कई बार लोग खुद बंदरों के हमले का शिकार हो जाते हैं।
निवासियों का कहना है कि यह स्थिति केवल अशोक विहार कॉलोनी की नहीं है। चोमू नगर के कई वार्ड, गलियां, मोहल्ले और चौराहे भी बंदरों की समस्या से प्रभावित हैं।
लोगों का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में बंदरों के हमलों में सैकड़ों लोग घायल होकर अस्पताल पहुंच चुके हैं। पिछले वर्ष बंदरों से बचने के प्रयास में एक महिला के मकान की छत से गिरने और उसकी मौत होने की घटना का भी स्थानीय लोगों ने उल्लेख किया।
घटना के बाद चोमू के व्यापारियों और नागरिकों ने पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष आशीष दुसाद के साथ तत्कालीन एसडीएम को ज्ञापन सौंपा था। इसमें बंदरों की समस्या से राहत दिलाने और मृत महिला के परिजनों को मुआवजा देने की मांग की गई थी।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक वर्ष बीतने के बावजूद उस ज्ञापन पर कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने नगर निकाय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बंदरों को पकड़ने या नियंत्रित करने के नाम पर लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि ठेकेदारों और व्यवस्था के बीच समन्वय की कमी या मिलीभगत के कारण कार्रवाई प्रभावी ढंग से पूरी नहीं हो पाती। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अशोक विहार और चोमू के अन्य इलाकों के निवासी अब प्रशासन और नगर निकाय से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि बंदरों को सुरक्षित तरीके से पकड़ने, पुनर्वास, नियमित निगरानी और प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सहायता की व्यवस्था की जानी चाहिए।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि समस्या अब केवल असुविधा की नहीं, बल्कि जन-सुरक्षा का मामला बन चुकी है।