



जयपुर/चौमू। जयपुर जिले के चौमू निवासी नीरज खंडेलवाल, पुत्र अशोक खंडेलवाल (अशोका बर्तन वाले), ने भारत के स्पेस सेक्टर के लिए ‘Everest’ नामक FFSC रॉकेट इंजन विकसित करने का दावा करते हुए बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल की है। इसे भारत का पहला FFSC रॉकेट इंजन बताया जा रहा है।
नीरज खंडेलवाल ने इस तकनीकी परियोजना के साथ Astrobase के काम को भी आगे बढ़ाया है। प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान उन्होंने Everest इंजन और Astrobase से जुड़े कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की।
चौमू जैसे छोटे शहर से निकलकर अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में काम करने वाले नीरज खंडेलवाल की यह उपलब्धि स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
परिवार और समाज से जुड़े लोगों ने इसे केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि चौमू और राजस्थान के लिए भी गर्व का विषय बताया है।
FFSC यानी Full-Flow Staged Combustion तकनीक आधुनिक रॉकेट इंजन डिजाइन की उन्नत श्रेणी मानी जाती है। इसमें ईंधन और ऑक्सीडाइज़र दोनों को मुख्य दहन कक्ष में पहुंचने से पहले अलग-अलग प्री-बर्नर सिस्टम के माध्यम से इस्तेमाल किया जाता है।
इस तकनीक का उद्देश्य उच्च दक्षता, बेहतर थ्रस्ट और इंजन प्रदर्शन को बढ़ाना होता है। हालांकि ‘Everest’ इंजन की तकनीकी क्षमता, परीक्षण स्थिति और व्यावसायिक उपयोग से जुड़ी विस्तृत जानकारी स्वतंत्र तकनीकी सत्यापन के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।
नीरज खंडेलवाल ने प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात के दौरान अपने रॉकेट इंजन प्रोजेक्ट और Astrobase से जुड़े तकनीकी काम की जानकारी साझा की।
इस मुलाकात को निजी स्पेस टेक्नोलॉजी क्षेत्र में काम कर रहे युवा उद्यमियों और इंजीनियरों के लिए महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
नीरज खंडेलवाल की उपलब्धि पर अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के विभिन्न पदाधिकारियों और सदस्यों ने प्रसन्नता व्यक्त की है।
महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश चंद्र गुप्ता (तुंगा वाले), मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष संजीव कट्टा, महासभा पत्रिका के मुख्य संपादक राम निरंजन खुटेटा, राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी तथा सिक्किम प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के कुलसचिव प्रोफेसर रमेश कुमार रावत, राष्ट्रीय युवा संयोजक शरद फरसोईया सहित कई पदाधिकारियों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं।
राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, असम, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों तथा कोलकाता, दिल्ली, अहमदाबाद, हैदराबाद, रतलाम, मुंबई और राजनांदगांव जैसे शहरों से समाज के पदाधिकारियों, कार्यकारिणी सदस्यों और आजीवन सदस्यों ने भी उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
भारत में निजी स्पेस सेक्टर के विस्तार के साथ नई तकनीकों, इंजन डिजाइन, लॉन्च सिस्टम और स्पेस स्टार्टअप्स के लिए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में युवाओं द्वारा विकसित किए जा रहे स्वदेशी तकनीकी समाधान भविष्य की स्पेस इकॉनमी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
नीरज खंडेलवाल की ‘Everest’ परियोजना को भी इसी दिशा में एक महत्वाकांक्षी प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।