



जयपुर।जयपुर में रविवार को एक चलती लो-फ्लोर बस में अचानक आग लगने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। बस कालवाड़ से चांदपोल की ओर जा रही थी। इंजन वाले हिस्से से धुआं निकलता देख बस को तुरंत रोका गया और सभी यात्रियों को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग बस के इंजन वाले हिस्से से शुरू हुई। धुआं बढ़ने के साथ यात्रियों ने बाहर निकलना शुरू किया। इसी दौरान पीछे से आ रहे पानी के टैंकर की मदद से आग पर काबू पाया गया। आग बुझने के बाद बस को मौके से हटाया गया।
घटना के शुरुआती कारण के रूप में इंजन में तकनीकी खराबी की आशंका जताई जा रही है। हालांकि वास्तविक कारण तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
चलती बस में आग लगने से बड़ा हादसा हो सकता था, लेकिन समय रहते बस रोकने और यात्रियों को बाहर निकालने से किसी जनहानि की सूचना नहीं है।
घटना के बाद बस की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार बस में रखा अग्निशमन यंत्र खाली मिला।
यदि आपात स्थिति में बस का अग्निशमन उपकरण काम करने की स्थिति में नहीं हो तो शुरुआती स्तर पर आग बुझाने में गंभीर परेशानी हो सकती है। इस मामले में संयोग से मौके पर पानी का टैंकर उपलब्ध होने से आग को ज्यादा फैलने से रोक लिया गया।
रविवार की घटना ने शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में बसों के नियमित रखरखाव और सुरक्षा जांच का मुद्दा फिर सामने ला दिया है।
लो-फ्लोर बसें रोजाना बड़ी संख्या में यात्रियों को लेकर अलग-अलग रूटों पर चलती हैं। ऐसे में इंजन, वायरिंग, ब्रेक सिस्टम, बैटरी और अग्निशमन उपकरणों की नियमित जांच बेहद जरूरी है।
सवाल यह भी है कि फिटनेस और मेंटेनेंस के दौरान अग्निशमन यंत्र की वैधता, दबाव और उपयोग योग्य स्थिति को कितनी गंभीरता से जांचा जाता है।
जयपुर में इससे पहले भी सार्वजनिक बसों में आग लगने की घटनाएं सामने आती रही हैं। हर बार बसों के रखरखाव और फिटनेस जांच को लेकर सवाल उठते हैं।
अब रविवार की घटना के बाद शहर में चल रही लो-फ्लोर बसों की सुरक्षा व्यवस्था, अग्निशमन उपकरणों और तकनीकी फिटनेस की व्यापक जांच की मांग उठ सकती है।