Wednesday, 19 August 2026

कच्ची बस्तियों के पट्टाधारकों को बड़ी राहत: 3 साल पुराने अहस्तांतरणीय पट्टों का भी हो सकेगा हस्तांतरण


कच्ची बस्तियों के पट्टाधारकों को बड़ी राहत: 3 साल पुराने अहस्तांतरणीय पट्टों का भी हो सकेगा हस्तांतरण

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निकाय चुनाव से पहले सरकार का बड़ा फैसला, रजिस्टर्ड बिक्री के बाद अंतिम खरीदार के नाम हो सकेगा नामांतरण, मुख्तारनामा और गिफ्ट डीड वाले मामलों के निस्तारण का भी रास्ता साफ

जयपुर। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव की घोषणा से पहले राज्य सरकार ने शहरी क्षेत्रों में पट्टों के नामांतरण को लेकर महत्वपूर्ण फैसला किया है। शहरी सेवा शिविर के तहत अब कच्ची बस्तियों में जारी किए गए तीन वर्ष पुराने अहस्तांतरणीय पट्टों का भी निर्धारित शर्तों के तहत हस्तांतरण और नामांतरण किया जा सकेगा। इस फैसले से उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्होंने कच्ची बस्तियों में ऐसा भूखंड खरीदा था, जिसके मूल पट्टे पर बिक्री अथवा हस्तांतरण की रोक लगी हुई थी।

नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार यह व्यवस्था उन कच्ची बस्तियों के मामलों में लागू होगी, जहां 29 जून 2022 के आदेश के तहत अहस्तांतरणीय शर्त के साथ पट्टे जारी किए गए थे।

तीन साल पूरे होने के बाद अंतिम खरीदार के नाम हो सकेगा नामांतरण

नई व्यवस्था के तहत पट्टा जारी होने के तीन वर्ष पूरे होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया अपनाकर संबंधित भूखंड का हस्तांतरण किया जा सकेगा। यदि मूल पट्टाधारी ने भूखंड को पंजीकृत विक्रय पत्र (Registered Sale Deed) के जरिए किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया और इसके बाद वह संपत्ति एक या एक से अधिक बार आगे बिक चुकी है, तो निर्धारित शर्तें पूरी होने पर वर्तमान यानी अंतिम खरीदार के नाम नामांतरण किया जा सकेगा। इसके लिए आवेदक को भूमि निष्पादन नियमों के अनुसार सरकार की ओर से निर्धारित राशि जमा करानी होगी।

ऐसे समझें नई व्यवस्था

मान लीजिए किसी कच्ची बस्ती में एक व्यक्ति को अहस्तांतरणीय शर्त के साथ पट्टा जारी किया गया। बाद में उसने रजिस्टर्ड दस्तावेज के जरिए भूखंड दूसरे व्यक्ति को बेच दिया और बाद में वह भूखंड किसी तीसरे व्यक्ति को बेच दिया गया।

अब पट्टा जारी होने के तीन वर्ष पूरे होने और निर्धारित औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रिकॉर्ड में अंतिम खरीदार के नाम नामांतरण कराने का रास्ता खुल सकेगा। इससे ऐसे मामलों में संपत्ति के रिकॉर्ड और वास्तविक कब्जे अथवा स्वामित्व के दस्तावेजों के बीच चली आ रही विसंगतियों के समाधान में मदद मिल सकती है।

हर अहस्तांतरणीय पट्टे पर लागू नहीं होगा 3 साल वाला नियम

सरकार ने आदेश में एक महत्वपूर्ण स्थिति भी स्पष्ट की है। तीन वर्ष पूरे होने का नियम हर प्रकार के अहस्तांतरणीय पट्टे पर स्वतः लागू नहीं होगा।कच्ची बस्तियों के अलावा अन्य श्रेणियों में जारी अहस्तांतरणीय पट्टों के मामलों में संबंधित पट्टे में दर्ज शर्तों का पालन करना आवश्यक होगा।इसलिए केवल यह आधार पर्याप्त नहीं होगा कि पट्टा तीन साल पुराना हो गया है। संबंधित संपत्ति की श्रेणी, पट्टे की शर्त और उस पर लागू नियमों को देखने के बाद ही हस्तांतरण अथवा नामांतरण पर फैसला होगा।

मुख्तारनामा और गिफ्ट डीड वाले मामलों में भी निर्देश

सरकार ने यूआईटी, विकास प्राधिकरण और नगरीय निकायों की ओर से जारी पट्टों के नाम हस्तांतरण से जुड़े मामलों में मुख्तारनामा (Power of Attorney) और Gift Deed जैसे दस्तावेजों के आधार पर लंबित मामलों के निस्तारण को लेकर भी निर्देश दिए हैं। ऐसे प्रकरणों का निस्तारण 8 जनवरी 2020 के आदेश और 15 जनवरी 2020 की अधिसूचना में निर्धारित दस्तावेजों एवं प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।

पट्टा मिलने से पहले ही भूखंड बिक चुका है तो अलग प्रक्रिया

ऐसे मामले भी सामने आते हैं, जिनमें किसी व्यक्ति को आवंटन तो पहले हो गया था, लेकिन पट्टा जारी होने से पहले ही उसने भूखंड किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दिया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे प्रकरणों में वित्त विभाग की 10 जुलाई 2024 और 12 सितंबर 2024 की अधिसूचनाओं के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।इस प्रकार अलग-अलग प्रकृति के नामांतरण मामलों के लिए सरकार ने लागू आदेशों और अधिसूचनाओं के आधार पर प्रक्रिया स्पष्ट करने का प्रयास किया है।

शहरी सेवा शिविर में बड़ी संख्या में मामलों के निस्तारण की उम्मीद

सरकार के इस फैसले का असर विशेष रूप से उन शहरी क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है, जहां कच्ची बस्तियों के पट्टों की खरीद-बिक्री हो चुकी है लेकिन अहस्तांतरणीय शर्त के कारण रिकॉर्ड में नए खरीदार का नाम दर्ज नहीं हो पा रहा था।

नई व्यवस्था के बाद पात्र मामलों में निर्धारित राशि और दस्तावेज जमा कराकर नामांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। हालांकि प्रत्येक मामले में संबंधित पट्टे की शर्त, संपत्ति की श्रेणी और लागू सरकारी आदेशों को देखना आवश्यक होगा।

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