



SIMC मामले में FIR के लिए चीफ कमिश्नर को लिखा, नियोक्ता की ट्रिब्यूनल में अपील, सुप्रीम कोर्ट में IA दाखिल करने की तैयारी, SI TV में उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आंशिक आदेश देने पर भी चर्चा
लखनऊ। सहारा इंडिया मास कम्युनिकेशन (SIMC) और सहारा इंडिया टीवी (SI TV) से जुड़े कर्मचारियों के लंबित भविष्य निधि (PF) मामले को लेकर लखनऊ स्थित कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) कार्यालय में पीएफ कमिश्नर से विस्तृत मुलाकात की गई। बैठक में अब तक हुई कार्रवाई, कर्मचारियों के खातों में बकाया पीएफ राशि जमा होने की संभावित प्रक्रिया और दोनों मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर चर्चा हुई।
मुलाकात के दौरान पीएफ कमिश्नर को बताया गया कि मामला लंबे समय से लंबित होने के कारण कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से SI TV के मामले में अभी तक अंतिम आदेश या असेसमेंट पारित नहीं होने का मुद्दा उठाया गया। नियोक्ता की ओर से आवश्यक रिकॉर्ड और सहयोग उपलब्ध नहीं कराने के कारण मामले में हो रही देरी पर भी चिंता जताई गई।
बैठक में पीएफ कमिश्नर की ओर से बताया गया कि SIMC से संबंधित मामले में आदेश पारित हो चुका है। इस मामले में आगे की कार्रवाई के तहत FIR के लिए चीफ कमिश्नर को लिखा गया है।
हालांकि, नियोक्ता की ओर से संबंधित आदेश के खिलाफ ट्रिब्यूनल में अपील दायर की गई है। इस कारण मामला अब कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण में है।
कर्मचारियों की पीएफ राशि जमा कराने के लिए उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर भी EPFO की ओर से कार्रवाई की जा रही है।
चर्चा के दौरान बताया गया कि दोनों कंपनियों से कर्मचारियों का बकाया पीएफ जमा कराने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट में इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन (IA) दाखिल करने की दिशा में भी कार्रवाई की जा रही है।
बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण संबंधित संपत्तियों को बेचने में कानूनी बाधा आ रही है। इसके अलावा कई संपत्तियों के टाइटल स्पष्ट नहीं होने की समस्या भी सामने आ रही है।
इन्हीं कारणों से कंपनी से जुड़े कई अन्य मामले भी लंबित बताए गए हैं। यदि संपत्तियों के संबंध में कानूनी बाधा नहीं होती तो रिकवरी की प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेजी से आगे बढ़ सकती थी।
पीएफ कमिश्नर के साथ हुई चर्चा में यह बात भी सामने आई कि पिछले कुछ समय से नियोक्ता पक्ष के प्रतिनिधि सुनवाई में नियमित रूप से उपस्थित नहीं हो रहे थे।
EPFO की ओर से व्यक्तिगत कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के बाद अब नियोक्ता पक्ष के प्रतिनिधियों ने सुनवाई में उपस्थित होना शुरू किया है।
कमिश्नर के अनुसार कंपनी अभी बंद नहीं हुई है, इसलिए संबंधित पक्ष को मामले की सुनवाई में उपस्थित होकर सहयोग करना होगा। यदि नियोक्ता सुनवाई में उपस्थित नहीं होता है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ व्यक्तिगत स्तर पर भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
कर्मचारियों के लिए बैठक से सबसे महत्वपूर्ण बात पीएफ बकाया राशि की रिकवरी को लेकर सामने आई। चर्चा के दौरान कमिश्नर ने भरोसा दिलाया कि मामला जटिल होने के कारण समय लग रहा है, लेकिन कर्मचारियों के पीएफ की राशि दिलाने के लिए प्रक्रिया जारी है।
मामले में प्रमुख समस्या नियोक्ता की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलना, संपत्तियों की बिक्री पर कानूनी बाधा और कुछ संपत्तियों के टाइटल स्पष्ट नहीं होना बताया गया।
SI TV से जुड़े कर्मचारियों के मामले में विशेष रूप से यह मुद्दा उठाया गया कि अभी तक कोई अंतिम आदेश अथवा असेसमेंट पारित नहीं किया गया है।
EPFO की ओर से बताया गया कि सहारा इंडिया टीवी नेटवर्क अपने आप में अलग कंपनी नहीं होने और सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन के अंतर्गत बड़ी संख्या में कर्मचारियों के होने के कारण असेसमेंट में कठिनाई आ रही है।
इसके साथ ही नियोक्ता की ओर से आवश्यक बैलेंस शीट और कर्मचारियों की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराने के कारण भी प्रक्रिया में देरी होने की बात सामने आई।
बैठक के दौरान पीएफ कमिश्नर से आग्रह किया गया कि नियोक्ता की ओर से पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराने के कारण कर्मचारियों के हितों को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जाए।
इसलिए EPFO के पास अभी तक जो डेटा और दस्तावेज उपलब्ध हैं, उनके आधार पर पार्शियल असेसमेंट/ऑर्डर पारित करने का सुझाव दिया गया।
इस प्रस्ताव पर कमिश्नर की ओर से सकारात्मक सहमति व्यक्त किए जाने की बात कही गई। ऐसा होने पर उपलब्ध रिकॉर्ड में शामिल SI TV कर्मचारियों के मामलों को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है।
बैठक में कर्मचारियों को एक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया गया। पीएफ कमिश्नर के अनुसार मामले से जुड़े कर्मचारी EPFO की ऑनलाइन सुनवाई में शामिल होकर अपनी बात रख सकते हैं।
ऑनलाइन सुनवाई का लिंक संबंधित साइट पर उपलब्ध होने पर कर्मचारी Webex के माध्यम से जुड़ सकते हैं। एक साथ कई संबंधित कर्मचारियों के सुनवाई में शामिल होने से यह भी सामने आएगा कि कितने कर्मचारी लगातार अपने पीएफ मामले को आगे बढ़ा रहे हैं।
इसलिए SIMC और SI TV से जुड़े कर्मचारियों से आग्रह किया गया है कि जब भी मामले की सुनवाई हो, वे संभव हो तो उसमें अवश्य शामिल हों।
बैठक में व्यक्तिगत पीएफ समस्याओं को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। जिन कर्मचारियों के खाते में कोई करेक्शन लंबित है, रिकॉर्ड में गड़बड़ी है अथवा PF से जुड़ी कोई शिकायत लंबे समय से हल नहीं हुई है, वे EPFO के संबंधित लखनऊ कार्यालय को ई-मेल के माध्यम से अपनी शिकायत भेज सकते हैं।
यदि पहली शिकायत पर कार्रवाई नहीं होती है तो कर्मचारी उसका रिमाइंडर भी भेज सकते हैं। बताया गया कि लिखित रूप में प्राप्त ऐसी शिकायतों और रिमाइंडर को गंभीरता से लिया जा रहा है।
यह व्यवस्था उन मामलों में विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है, जहां कर्मचारी ने नियोक्ता के पास करेक्शन रिक्वेस्ट भेज रखी है, लेकिन नियोक्ता की ओर से उस पर कार्रवाई नहीं की जा रही।
मुलाकात के बाद SIMC और SI TV से जुड़े सभी कर्मचारियों से अपील की गई है कि वे अपने PF मामले को लेकर सक्रिय रहें। जब भी EPFO में ऑनलाइन सुनवाई निर्धारित हो, उसमें शामिल होने का प्रयास करें और आवश्यकता होने पर अपनी व्यक्तिगत शिकायत लिखित रूप से संबंधित कार्यालय को भेजें।
EPFO अधिकारियों के साथ करीब दो से तीन घंटे तक मामले के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान SIMC और SI TV कर्मचारियों की पीएफ राशि, कानूनी अड़चनों और आगे की संभावित कार्रवाई पर बातचीत की गई।
फिलहाल SIMC का मामला आदेश के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया में है, जबकि SI TV के मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आंशिक आदेश पारित किए जाने की संभावना पर चर्चा हुई है। कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि प्रक्रिया लंबी और जटिल जरूर है, लेकिन पीएफ की रिकवरी के लिए प्रयास जारी हैं।