



इन बसों का संचालन महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के सामने निर्माणाधीन ई-बस डिपो से प्रस्तावित है। संभावना जताई जा रही है कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ई-बसों को हरी झंडी दिखाकर सेवा की शुरुआत की जा सकती है।
नगरीय परिवहन सेवा के तहत बीकानेर को पहले चरण में कुल 75 ई-बसों का आवंटन किया गया है। महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के सामने तैयार किए जा रहे डिपो में इन सभी बसों के संचालन, चार्जिंग और रखरखाव की व्यवस्था विकसित की जा रही है। फिलहाल चार बसें बीकानेर पहुंच चुकी हैं, जबकि जल्द ही एक और ई-बस पहुंचने की संभावना है।
ई-बस संचालन का जिम्मा संभाल रही कंपनी सीएसएल के वाइस प्रेसिडेंट धीरज पाराशर के अनुसार, बीकानेर पहुंची बसें 25 सीटर हैं। इनमें महिलाओं के लिए चार पिंक सीटें आरक्षित रहेंगी। इसके अलावा बस में 11 यात्रियों के खड़े होकर सफर करने की भी व्यवस्था है। इस तरह एक बस में बैठकर और खड़े होकर कुल 36 यात्री सफर कर सकेंगे।
ई-बसों को यात्री सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। प्रत्येक बस में सात सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
हर सीट पर पैनिक बटन की सुविधा दी गई है, जिससे आपात स्थिति में यात्री तुरंत सहायता का संकेत दे सकेंगे। इसके अलावा इमरजेंसी विंडो और प्रत्येक सीट के पास हैमर की व्यवस्था भी की गई है।
दिव्यांग यात्रियों की सुविधा के लिए बसों में व्हीलचेयर लिफ्ट डोर की व्यवस्था की गई है। इससे व्हीलचेयर उपयोग करने वाले यात्रियों को बस में चढ़ने और उतरने में आसानी होगी। सभी बसें पूरी तरह वातानुकूलित हैं, जिससे गर्मी के मौसम में भी यात्रियों को बेहतर सफर अनुभव मिल सकेगा।
ई-बसों की पहली खेप शहर पहुंच चुकी है, लेकिन नियमित संचालन के लिए जरूरी आधारभूत ढांचा अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है। निविदा शर्तों के अनुसार डिपो का निर्माण 25 मई तक पूरा होना था, लेकिन अगस्त के दूसरे सप्ताह तक भी कई काम अधूरे बताए जा रहे हैं।
डिपो में बसों के रखरखाव के लिए शेड का निर्माण जारी है। चार्जिंग व्यवस्था के लिए कुल 15 चार्जर लगाए जाने हैं, लेकिन फिलहाल केवल दो चार्जर ही तैयार हो पाए हैं। इसके अलावा डिपो में प्रस्तावित ओवरहेड टंकी का निर्माण भी पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में नियमित संचालन शुरू करने से पहले इन बुनियादी व्यवस्थाओं को पूरा करना जरूरी होगा। ई-बस सेवा शुरू होने के बाद बीकानेर में सार्वजनिक परिवहन को नई दिशा मिलने और प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।