Monday, 10 August 2026

आदर्श नगर श्मशान घाट की जमीन पर अतिक्रमण का मामला: हाईकोर्ट ने सर्वे के लिए दिए 4 सप्ताह, कब्जा मिले तो विभाग मिलकर हटाएं


आदर्श नगर श्मशान घाट की जमीन पर अतिक्रमण का मामला: हाईकोर्ट ने सर्वे के लिए दिए 4 सप्ताह, कब्जा मिले तो विभाग मिलकर हटाएं

ख़बर सुनिए:

0:00
0:00
Audio thumbnail

वन विभाग और नगर निगम के बीच क्षेत्राधिकार विवाद पर हाईकोर्ट सख्त, अगली सुनवाई तक पालना रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
जयपुर। आदर्श नगर स्थित श्मशान घाट और अमरनाथ की बगीची की जमीन पर कथित अतिक्रमण के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने वन विभाग को भूमि का सर्वे कराने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सर्वे के दौरान यदि जमीन पर अतिक्रमण पाया जाता है तो संबंधित सभी विभाग समन्वय के साथ उसे हटाने की कार्रवाई करें और वन विभाग का पूरा सहयोग करें।

जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने यह निर्देश हुकुम सिंह की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने अगली सुनवाई तक मामले में की गई कार्रवाई की पालना रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है।

वन विभाग ने सर्वे के लिए मांगा समय

सुनवाई के दौरान वन विभाग की ओर से अदालत को बताया गया कि यह स्पष्ट करने के लिए सर्वे कराना आवश्यक है कि संबंधित भूमि किस विभाग के अधीन आती है और वास्तविक स्थिति क्या है। विभाग ने सर्वे की प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय मांगा। इस पर हाईकोर्ट ने चार सप्ताह का समय देते हुए निर्देश दिया कि सर्वे निष्पक्ष और समन्वित तरीके से किया जाए। यदि सर्वे के दौरान किसी प्रकार का अतिक्रमण पाया जाता है तो केवल क्षेत्राधिकार के विवाद के आधार पर कार्रवाई लंबित नहीं रखी जाए।

‘अतिक्रमण मिला तो सभी विभाग मिलकर करें कार्रवाई’

खंडपीठ ने निर्देश दिए कि सर्वे में अतिक्रमण सामने आने की स्थिति में संबंधित विभाग संयुक्त रूप से कार्रवाई करें। अदालत ने यह भी कहा कि वन विभाग को अन्य विभाग आवश्यक सहयोग दें, ताकि अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की प्रशासनिक बाधा न आए।

2021 में भी दिए गए थे अतिक्रमण हटाने के निर्देश

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अखिल सिमलोट ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट ने 15 नवंबर 2021 को आदर्श नगर स्थित अमरनाथ की बगीची से अवैध अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे।

उन्होंने अदालत को बताया कि इसके बाद 24 अगस्त 2023 को तत्कालीन नगर निगम कमिश्नर ने कोर्ट में कहा था कि संबंधित भूमि वन विभाग के अधीन आती है। इसके बाद से नगर निगम और वन विभाग क्षेत्राधिकार को लेकर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।

कोर्ट से गठित कमेटी ने भी भूमि को बताया था वन विभाग की

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि अदालत के आदेश से गठित कमेटी ने भी संबंधित भूमि को वन विभाग के अधीन माना था। इसके बावजूद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई लंबित रही।

अधिवक्ता ने तर्क दिया कि केवल इस आधार पर अवैध अतिक्रमण जारी नहीं रहने दिया जा सकता कि दो सरकारी विभाग आपस में क्षेत्राधिकार को लेकर विवाद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम कानून और हाईकोर्ट के पूर्व निर्देशों के तहत अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी संबंधित निकाय की है और विभागीय विवाद की वजह से अदालत के आदेश की पालना प्रभावित नहीं हो सकती।

अगली सुनवाई तक पेश करनी होगी पालना रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने अब वन विभाग को चार सप्ताह में सर्वे प्रक्रिया आगे बढ़ाने और संबंधित विभागों को आवश्यकता पड़ने पर संयुक्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक मामले में उठाए गए कदमों की पालना रिपोर्ट पेश की जाए।

Previous
Next

Related Posts