



पुरानी हवेली से मिला चांदी का खजाना: बंटवारे के विवाद से खुला राज, आरोपियों ने चांदी बेचकर ट्रैक्टर-जेसीबी खरीदी, बेटी की शादी और गहनों पर खर्च किए रुपए
जयपुर। जयपुर के त्रिपोलिया बाजार स्थित करीब 200 साल पुरानी हवेली को तोड़ने के दौरान चांदी का खजाना मिलने और उसे कथित रूप से छिपाकर आपस में बांटने का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, हवेली तोड़ने के दौरान ठेकेदार और मजदूरों को चांदी की दो बड़ी सिल्लियां और करीब 1500 चांदी के सिक्के मिले थे। आरोप है कि पांचों ने इसकी जानकारी हवेली मालिक से छिपाई और खजाने को आपस में बांटने की योजना बना ली।
पुलिस ने गिरफ्तार पांचों आरोपियों को रविवार को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की। पूछताछ में सामने आया कि चांदी के सिक्के बांटने के बाद दो भारी सिल्लियों को जामडोली के जंगल में गड्ढा खोदकर दबा दिया गया था, जबकि सिक्कों का एक बड़ा हिस्सा बेच दिया गया।
माणक चौक थाना पुलिस के अनुसार, त्रिपोलिया बाजार में विद्याधर का रास्ता स्थित राहुल सेठी की करीब 200 साल पुरानी हवेली का लगभग 450 वर्गगज हिस्सा जर्जर हो चुका था। नगर निगम की ओर से जर्जर हिस्से को गिराने के लिए नोटिस जारी किया गया था।
इसके बाद हवेली मालिक ने एक निजी कंपनी के साथ पुरानी बिल्डिंग तोड़कर नया निर्माण करने का एग्रीमेंट किया। नई बिल्डिंग बनाकर देने के बदले बिल्डर को 35 प्रतिशत हिस्सेदारी दी जानी थी। हवेली को तोड़ने का काम करीब 4 लाख रुपए में महेश मल्होत्रा उर्फ छोटू को दिया गया।
पुलिस के अनुसार, नवंबर 2025 में ठेकेदार छोटू ने मजदूर जगदीश राजोरिया, ओमप्रकाश खींची उर्फ पप्पू, अनुज अरोड़ा और रजनी मल्होत्रा के साथ हवेली तोड़ने का काम शुरू किया था। करीब 10 दिन बाद उन्हें चांदी की एक बड़ी सिल्ली मिली।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि पहली सिल्ली मिलने के बाद पांचों ने कथित रूप से तय किया कि खजाने की जानकारी किसी को नहीं दी जाएगी और इसे आपस में बांट लिया जाएगा।
किसी को संदेह न हो, इसके लिए रोज की तरह हवेली तोड़ने का काम जारी रखा गया। शाम को अंधेरा होने के बाद चांदी की सिल्ली स्कूटी पर रखकर वहां से ले जाई गई। इसके बाद और खजाना मिलने की उम्मीद में हवेली की खुदाई और तोड़फोड़ सावधानी से की गई। इसी दौरान चांदी की एक और बड़ी सिल्ली तथा बड़ी संख्या में चांदी के सिक्के मिले।
पुलिस पूछताछ के अनुसार, खजाने में मिले करीब 1500 सिक्कों को पांचों ने आपस में बराबर बांटा और प्रत्येक ने 300-300 सिक्के अपने पास रख लिए। दोनों चांदी की सिल्लियों का वजन करीब 31 किलो और 35 किलो बताया गया है। आरोपियों ने इनका तत्काल बंटवारा करने के बजाय दो से तीन साल बाद बांटने का फैसला किया। इसके बाद दोनों सिल्लियों को जामडोली के जंगल में ले जाकर गड्ढा खोदकर दबा दिया गया।
पुलिस के अनुसार, ठेकेदार छोटू ने अनुज अरोड़ा के हिस्से के 300 सिक्के अपने पास रख लिए और बदले में उसे 50 हजार रुपए दिए। बाद में इन सिक्कों को जयपुर से बाहर बेच दिया गया। आरोप है कि सिक्के बेचने से मिली रकम में से करीब 4.50 लाख रुपए देकर दो ट्रैक्टर खरीदे गए और कुछ रकम देकर सेकंड हैंड जेसीबी खरीदने का एग्रीमेंट किया गया।
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि मजदूर जगदीश ने अपने हिस्से के चांदी के सिक्के बेच दिए। पुलिस के अनुसार, उसने अपनी होमगार्ड में कार्यरत बेटी की शादी में करीब 20 लाख रुपए खर्च किए, जिसमें करीब 9 लाख रुपए सिक्के बेचने से मिले थे। वहीं रजनी ने भी अपने हिस्से के चांदी के सिक्के बेचकर अपने लिए गहने बनवाए।
खजाने का मामला करीब 10 महीने तक दबा रहा। पुलिस के अनुसार, ओमप्रकाश के हिस्से के सिक्के बेचकर मिली रकम भी ठेकेदार छोटू ने अपने पास रख ली थी।
जब अनुज को पता चला कि अन्य मजदूरों के सिक्के बेचने पर लाखों रुपए मिले हैं तो उसने ठेकेदार से अपने हिस्से की बाकी रकम मांगी। आरोप है कि ठेकेदार ने उसे बताया कि हवेली मालिक को खजाने की जानकारी मिल गई है और अब खजाना वापस करना पड़ेगा। इसके बाद अनुज ने ओमप्रकाश से संपर्क किया और हवेली मालिक के बारे में जानकारी जुटाई। बाद में उसने हवेली मालिक राहुल सेठी को तोड़फोड़ के दौरान मिले खजाने की जानकारी दे दी। इसके बाद राहुल सेठी ने माणक चौक थाने में मामला दर्ज कराया।
डीसीपी नॉर्थ करण शर्मा के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने बड़ी संख्या में चांदी के सिक्के बेचकर मिली रकम से अपनी जरूरतें पूरी करने की बात स्वीकार की है। आरोपियों ने सिक्के जयपुर से बाहर बेचने की जानकारी दी है। अब पुलिस चांदी के सिक्के खरीदने वालों की पहचान करने, बिक्री से जुड़े लेन-देन की जांच करने और शेष सिक्कों की बरामदगी के प्रयास में जुटी है। आरोपियों को अदालत में पेश कर दोबारा रिमांड पर लेने की तैयारी की जा रही है।