Wednesday, 05 August 2026

टोंक में आरयूआईडीपी के पुराने कार्यों की गुणवत्ता पर उठे सवाल, कलक्टर टीना डाबी ने अधिकारियों को दी सख्त हिदायत


टोंक में आरयूआईडीपी के पुराने कार्यों की गुणवत्ता पर उठे सवाल, कलक्टर टीना डाबी ने अधिकारियों को दी सख्त हिदायत

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पांचवें चरण में 41.26 करोड़ रुपए के कार्य प्रस्तावित, कलक्टर ने कहा—परियोजना के क्रियान्वयन से आमजन को कम से कम परेशानी हो

टोंक। राजस्थान नगरीय आधारभूत विकास परियोजना (आरयूआईडीपी) के पांचवें चरण में टोंक शहर में करीब 41.26 करोड़ रुपए के विकास कार्य किए जाएंगे। प्रस्तावित कार्यों को लेकर बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला कलक्टर टीना डाबी की अध्यक्षता में ‘आरयूआईडीपी संवाद’ आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, पूर्व पार्षदों, प्रबुद्ध नागरिकों, मीडिया प्रतिनिधियों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों और अन्य हितधारकों को प्रस्तावित कार्यों की जानकारी दी गई। उनसे परियोजना को लेकर सुझाव और फीडबैक भी लिए गए।

बैठक में आरयूआईडीपी के पूर्व कार्यों की गुणवत्ता और उनसे आमजन को हुई परेशानियों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। जिला कलेक्टर ने अधिकारियों को पुराने अनुभवों से सीख लेते हुए आगामी कार्यों को बेहतर गुणवत्ता और समन्वय के साथ पूरा करने के निर्देश दिए।

41.26 करोड़ रुपए के होंगे विकास कार्य

आरयूआईडीपी के अधिशासी अभियंता पुरुषोत्तम ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से पांचवें चरण में प्रस्तावित कार्यों की जानकारी दी।

परियोजना के तहत एशियाई विकास बैंक के वित्तपोषण से अपशिष्ट जल प्रबंधन और शोधित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग पर करीब 21.98 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

बाढ़ प्रबंधन और ड्रेनेज से जुड़े कार्यों पर 8.03 करोड़ रुपए तथा कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, विरासत संरक्षण और पर्यटन संबंधी कार्यों पर 11.25 करोड़ रुपए व्यय किए जाने का प्रस्ताव है।

‘आमजन को कम से कम हो परेशानी’

जिला कलक्टर टीना डाबी ने कहा कि परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि आमजन को कम से कम परेशानी हो।

उन्होंने कहा कि सीवरेज परियोजनाओं के दौरान सड़क खोदने, यातायात प्रभावित होने और स्थानीय लोगों को असुविधा जैसी कई समस्याएं सामने आती हैं। ऐसे में कार्य शुरू करने से पहले प्रभावी योजना बनाना और संबंधित विभागों के बीच समन्वय रखना जरूरी है।

कलक्टर ने अधिकारियों से कहा कि टोंक में आरयूआईडीपी के पूर्व कार्यों के अनुभवों और कमियों को ध्यान में रखते हुए पांचवें चरण के कार्यों को बेहतर तरीके से लागू किया जाए।

गुणवत्ता और समयबद्धता का आश्वासन

आरयूआईडीपी के अधिशासी अभियंता ने प्रतिभागियों को आश्वस्त किया कि परियोजना के सभी कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप और तय समयसीमा में पूरे किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि संवाद कार्यक्रम में मिले उपयोगी सुझावों को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।

मीडिया प्रतिनिधियों ने पुरानी खामियों पर जताई नाराजगी

संवाद के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों ने टोंक में पूर्व में किए गए सीवरेज और पेयजल संबंधी कार्यों की खामियों का मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा कि पहले चौबीस घंटे स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने, बिना मोटर के तीसरी मंजिल तक पानी पहुंचाने और शहर में गंदगी की समस्या दूर करने जैसे दावे किए गए थे, लेकिन वर्तमान स्थिति इन आश्वासनों के अनुरूप नहीं है।

मीडिया प्रतिनिधियों ने आरयूआईडीपी से पिछली गलतियों को सुधारते हुए इस बार गुणवत्तापूर्ण और टिकाऊ कार्य करने की मांग की।

डीपीआर से पहले लिए जा रहे सुझाव

अतिरिक्त जिला कलक्टर विनोद कुमार मीना ने कहा कि यह कार्यशाला विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने से पहले आयोजित की गई है, ताकि जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और नागरिकों से मिले सुझावों को योजना में शामिल किया जा सके।

उन्होंने कहा कि परियोजना की सफलता के लिए आरयूआईडीपी, नगर परिषद और अन्य सहयोगी विभागों का आपसी समन्वय जरूरी है। सभी विभाग मिलकर काम करेंगे, तभी आमजन को समय पर योजना का लाभ मिल सकेगा।

स्थानीय निकाय और आरयूआईडीपी में समन्वय पर जोर

कार्यक्रम में विभिन्न वक्ताओं ने शहरी विकास से जुड़े कार्यों के सफल क्रियान्वयन के लिए आरयूआईडीपी और स्थानीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई।

पूर्व पार्षदों और जनप्रतिनिधियों ने भी पिछले कार्यों में रही कमियों से सीख लेकर आगामी सीवरेज, ड्रेनेज और विरासत संरक्षण कार्यों की प्रभावी निगरानी करने के सुझाव दिए।

घर-घर तक जानकारी पहुंचाने की अपील

नगर परिषद आयुक्त धर्मपाल जाट ने जनप्रतिनिधियों, पूर्व पार्षदों, हितधारकों और विभागीय अधिकारियों का आभार जताया।

उन्होंने विश्वास दिलाया कि नगर परिषद और टोंक के नागरिक परियोजना के क्रियान्वयन में पूरा सहयोग करेंगे। जनप्रतिनिधियों से योजना की जानकारी घर-घर तक पहुंचाने और लोगों को सहयोग के लिए प्रेरित करने की अपील भी की गई।

कार्यशाला में एक वृत्तचित्र के माध्यम से आरयूआईडीपी के कार्यों को प्रदर्शित किया गया। खुले सत्र में प्रतिभागियों ने सीवरेज, ड्रेनेज, ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण और अन्य प्रस्तावित कार्यों से संबंधित सवाल पूछे।

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