Wednesday, 05 August 2026

डिप्टी सीएम के नाम का दुरुपयोग कर तबादले का दबाव बनाने का आरोप, नर्सिंग ऑफिसर निलंबित


डिप्टी सीएम के नाम का दुरुपयोग कर तबादले का दबाव बनाने का आरोप, नर्सिंग ऑफिसर निलंबित

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चिकित्सा विभाग ने पुष्पेंद्र पारीक का मुख्यालय जैसलमेर किया, बिना अनुमति अनुपस्थित रहने और एफआईआर की सूचना छिपाने का भी आरोप

जयपुर। राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के नाम का कथित रूप से दुरुपयोग कर विभागीय अधिकारियों पर स्वयं के तबादले का दबाव बनाने के मामले में चिकित्सा विभाग ने जवाहरलाल नेहरू अस्पताल के नर्सिंग ऑफिसर पुष्पेंद्र पारीक को निलंबित कर दिया है।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य निदेशक राकेश कुमार शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि संबंधित कार्मिक ने संवैधानिक पदनाम का दुरुपयोग करते हुए पद की गरिमा को धूमिल करने वाला कृत्य किया। निलंबन अवधि के दौरान पारीक का मुख्यालय जैसलमेर रखा गया है।

तबादले के बाद अगले दिन से अनुपस्थित रहने का आरोप

विभागीय आदेश के अनुसार पुष्पेंद्र पारीक ने 20 जून को जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में स्थानांतरण के बाद कार्यभार ग्रहण किया था। इसके बाद वे 21 जून से बिना पूर्व स्वीकृति और सूचना के अनुपस्थित हो गए।

विभाग ने इस अनुपस्थिति को सेवा नियमों के उल्लंघन के रूप में दर्ज किया है।

पुलिस ने दर्ज किया था मुकदमा

मामले में सदर कोतवाली थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। हालांकि एफआईआर में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

विभागीय आदेश में कहा गया है कि लंबे समय तक अनुपस्थित रहने के बाद पारीक ने 18 जुलाई को दोबारा कार्यभार ग्रहण किया, लेकिन उस समय भी उन्होंने अपने कथित कृत्य और अपने विरुद्ध दर्ज एफआईआर की जानकारी विभाग को नहीं दी।

विभाग ने माना गंभीर अनुशासनहीनता

चिकित्सा विभाग ने संवैधानिक पद के नाम का इस्तेमाल कर अधिकारियों पर दबाव बनाने, बिना अनुमति अनुपस्थित रहने और एफआईआर की सूचना छिपाने को गंभीर अनुशासनहीनता माना है।

इसी आधार पर निलंबन की कार्रवाई की गई है। विभागीय जांच में आरोपों और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

निलंबन दोषसिद्धि नहीं

निलंबन एक विभागीय प्रशासनिक कार्रवाई है और इसे दोषसिद्धि नहीं माना जाता। संबंधित कार्मिक को नियमों के तहत अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। मामले की अंतिम स्थिति विभागीय जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।

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