



हाईकोर्ट की मौखिक टिप्पणी—ट्रिब्यूनल नहीं चला सकते तो बंद कर दें, नियुक्ति नहीं होने पर 11 अगस्त को कार्मिक सचिव को पेश होने का आदेश
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण (रेट) में अध्यक्ष और सदस्यों के खाली पदों को लेकर राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई है। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि सरकार ट्रिब्यूनल का संचालन नहीं कर सकती तो इसे बंद कर दिया जाए।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के तबादले किए गए हैं। ऐसे में सेवा संबंधी शिकायतों के निस्तारण के लिए अधिकरण का सक्रिय और प्रभावी रूप से काम करना जरूरी है।
जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण में अध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पदों पर सात दिन के भीतर नियुक्ति की जाए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि तय समय में नियुक्तियां नहीं होने पर 11 अगस्त को कार्मिक सचिव को व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट में उपस्थित होना होगा।
यह आदेश अधिवक्ता दिलीप सिंह कुरका, संदीप कलवानिया और अन्य वकीलों की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।
याचिका में अधिकरण के रिक्त पदों के कारण कर्मचारियों के सेवा संबंधी मामलों की सुनवाई और निस्तारण प्रभावित होने का मुद्दा उठाया गया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल उठाया कि जब बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों के तबादले किए जा रहे हैं, तब वे अपनी शिकायत लेकर कहां जाएंगे।
खंडपीठ ने कहा कि सेवा विवादों के समाधान के लिए गठित अधिकरण में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति नहीं होना गंभीर स्थिति है। इससे लंबित मामलों की संख्या बढ़ने और कर्मचारियों को समय पर राहत नहीं मिलने की आशंका है।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार को सात दिन के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करनी होगी। यदि ऐसा नहीं होता है तो कार्मिक सचिव को 11 अगस्त को अदालत के समक्ष उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ेगी।
मामले में अंतिम स्थिति आगामी सुनवाई और सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों के बाद स्पष्ट होगी।