



पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने निकाय-पंचायत और छात्रसंघ चुनावों में देरी पर उठाए सवाल; बोले—केवल मंत्री के इस्तीफे से परीक्षा व्यवस्था की समस्याएं खत्म नहीं होंगी
जयपुर। राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने पंचायत, नगर निकाय और छात्रसंघ चुनावों में देरी को लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। शनिवार को जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के असंतोष और चुनावी हार की आशंका के कारण समय पर चुनाव कराने से बच रही है।
पायलट ने केंद्र सरकार को नीट परीक्षा विवाद, युवाओं के भविष्य और संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली के मुद्दे पर भी घेरा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आगामी विधानसभा सत्र में कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाएगी।
सचिन पायलट ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार एक ओर ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की बात करती हैं, लेकिन दूसरी ओर संवैधानिक रूप से समय पर होने वाले स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में देरी की जा रही है।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार जमीनी स्थिति से घबराई हुई है, क्योंकि प्रदेश की जनता में असंतोष है और वह बदलाव चाहती है। उनके अनुसार इसी कारण पंचायत, नगर निकाय और छात्रसंघ चुनावों को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने 22 मई 2026 को राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनावों की पूरी प्रक्रिया 31 जुलाई तक संपन्न कराने के निर्देश दिए थे। अदालत ने चुनावों में अनावश्यक देरी को संवैधानिक दायित्व के विपरीत माना था।
पायलट ने कहा कि हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों और निर्देशों के बावजूद सरकार चुनाव कराने के बजाय अलग-अलग कारण बताकर समय मांगती रही है। इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं और स्थानीय प्रतिनिधित्व को नुकसान हो रहा है।
इससे पहले भी पायलट राज्य सरकार पर संभावित पराजय के भय से पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव टालने का आरोप लगा चुके हैं।
नीट परीक्षा विवाद पर पायलट ने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्र आंदोलन और जनदबाव का परिणाम बताया। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा स्वीकार किया था। इसके बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।
पायलट ने कहा कि केवल किसी मंत्री के इस्तीफे या कठोर कानून बनाने से परीक्षा प्रणाली की समस्याएं समाप्त नहीं होंगी। भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए परीक्षा माफिया, नकल गिरोह और कथित कोचिंग माफिया के खिलाफ संस्थागत एवं ढांचागत कार्रवाई करनी होगी।
उन्होंने कहा कि पेपर लीक से प्रभावित विद्यार्थियों को समयबद्ध न्याय, पारदर्शी जांच और सुरक्षित परीक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर संवैधानिक और स्वायत्त संस्थाओं का राजनीतिक उपयोग करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संस्थाओं की निष्पक्षता और स्वतंत्रता बनाए रखना आवश्यक है।
उन्होंने दावा किया कि विपक्षी नेताओं के खिलाफ संस्थाओं का चयनात्मक इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि सरकार से जुड़े मामलों में वैसी तत्परता दिखाई नहीं देती। ये आरोप पायलट का राजनीतिक पक्ष हैं; केंद्र और भाजपा इस प्रकार के आरोपों को पूर्व में खारिज करते रहे हैं।
आगामी विधानसभा सत्र को लेकर पायलट ने कहा कि विपक्ष पूरी तैयारी के साथ सदन में जाएगा। उन्होंने दावा किया कि सरकार का आधा कार्यकाल पूरा होने की ओर है, लेकिन चुनाव के दौरान किए गए अनेक वादे अभी धरातल पर दिखाई नहीं दे रहे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, किसानों की समस्याओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेगी। विपक्ष का दायित्व केवल विरोध करना नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को सदन में प्रभावी ढंग से उठाना भी है।