



गुर्जर की थड़ी इलाके में लाठी-डंडों से हमले के बाद हुई थी युवक की मौत, तीन वयस्क आरोपी गिरफ्तार, एक नाबालिग भी निरुद्ध
जयपुर। मानसरोवर थाना क्षेत्र में मामूली विवाद के बाद मध्यप्रदेश निवासी मजदूर की लाठी-डंडों से पिटाई कर हत्या करने के मामले में पुलिस ने तीन वयस्क आरोपियों को घटनास्थल पर ले जाकर मौका तस्दीक कराई। इस दौरान पुलिस आरोपियों को गुर्जर की थड़ी और शांति नगर क्षेत्र से लेकर गुजरी।
घटना 28 जुलाई को मानसरोवर मेट्रो स्टेशन के पास शांति नगर इलाके में हुई थी। हमले में गंभीर रूप से घायल मजदूर बलवीर की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। पुलिस ने मामले में तीन युवकों को गिरफ्तार करने के साथ एक नाबालिग को भी निरुद्ध किया है। पुलिस के अनुसार आरोपियों को घटना के कुछ समय बाद ही पकड़ लिया गया था।
पुलिस जांच के अनुसार बलवीर का आरोपियों से किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने उस पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया और गंभीर रूप से घायल अवस्था में छोड़कर फरार हो गए।
घायल बलवीर को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने प्रकरण में हत्या से संबंधित धाराएं जोड़कर आरोपियों की तलाश शुरू की।
पुलिस ने मामले में मनीष सोलंकी (23), निवासी रघुवीर नगर, दिल्ली; रमजान अली (19), निवासी अंबाबाड़ी, अजमेर और रोहित यादव (19), निवासी गुणसर, थाना कोटकासिम, जिला खैरथल-तिजारा को गिरफ्तार किया है।
मामले में शामिल बताए जा रहे एक नाबालिग को किशोर न्याय कानून के प्रावधानों के तहत निरुद्ध किया गया है। नाबालिग को सार्वजनिक मौका तस्दीक में शामिल नहीं किया गया।
शुक्रवार को पुलिस तीनों आरोपियों को घटनास्थल पर लेकर पहुंची। इस दौरान आरोपियों को उस स्थान और आसपास के रास्तों से ले जाया गया, जहां कथित मारपीट और उसके बाद की गतिविधियां हुई थीं।
पुलिस के अनुसार इस प्रक्रिया का उद्देश्य घटनाक्रम की पुष्टि, आरोपियों द्वारा बताए गए स्थानों का सत्यापन और मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाना था। आरोपियों को क्षेत्र में ले जाते समय वे लंगड़ाते हुए दिखाई दिए। हालांकि उन्हें चोट कैसे लगी, इस संबंध में पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
मानसरोवर थाना पुलिस हमले में इस्तेमाल किए गए लाठी-डंडों, घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों की जांच कर रही है। आरोपियों की भूमिका और घटनाक्रम की कड़ी जोड़ने के लिए मोबाइल लोकेशन तथा अन्य तकनीकी साक्ष्य भी जुटाए जा सकते हैं।
मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद होगी।