



उमर अब्दुल्ला और पायल ने मध्यस्थता के बाद दोनों पक्षों ने तलाक के लिए संयुक्त आवेदन दिया, संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विवाह समाप्त करने का आग्रह
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल अब्दुल्ला के बीच करीब तीन दशक पुराने विवाह को आपसी सहमति के आधार पर समाप्त करने पर सहमति दे दी है। अदालत को बताया गया कि दोनों पक्षों ने मध्यस्थता के माध्यम से अपने वैवाहिक विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान कर लिया है।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष उमर अब्दुल्ला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए। उन्होंने बताया कि दोनों पक्ष अलग होने के लिए सहमत हैं और संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विवाह समाप्त करने के लिए आवेदन दाखिल किया गया है। पीठ ने आवेदन और समझौते की शर्तों के अनुसार आदेश पारित करने की बात कही।
अदालत को बताया गया कि आपसी सहमति से विवाह समाप्त करने का आवेदन 22 जुलाई को दाखिल किया गया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़ी अपील का निस्तारण करते हुए समझौते को अपने आदेश का हिस्सा बनाने की बात कही।
अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को किसी मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश जारी करने की विशेष शक्ति देता है। विवाह पूरी तरह टूट जाने और दोनों पक्षों के समझौते की स्थिति में अदालत इस शक्ति का उपयोग विवाह समाप्त करने के लिए कर सकती है।
उमर अब्दुल्ला और पायल की शादी सितंबर 1994 में हुई थी। विभिन्न न्यायिक और मीडिया विवरणों के अनुसार दोनों वर्ष 2009 से अलग रह रहे थे, जबकि उमर अब्दुल्ला ने वर्ष 2011 में सार्वजनिक रूप से अलगाव की पुष्टि की थी। इस तरह विवाह करीब 32 वर्ष पुराना और अलगाव लगभग 17 वर्ष का रहा।
दोनों के दो बेटे हैं। समझौते की विस्तृत शर्तें सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई हैं।
इससे पहले उमर अब्दुल्ला ने क्रूरता और परित्याग के आधार पर विवाह समाप्त करने की मांग की थी। अगस्त 2016 में पारिवारिक अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
दिसंबर 2023 में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी पारिवारिक अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए उनकी अपील खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि प्रस्तुत आरोप तलाक का आधार साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
इसके बाद उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
अगस्त 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को अपने मध्यस्थता केंद्र के समक्ष उपस्थित होकर विवाद का समाधान तलाशने के निर्देश दिए थे। मध्यस्थता प्रक्रिया के बाद दोनों आपसी सहमति से विवाह समाप्त करने और लंबित विवादों को सुलझाने पर राजी हुए।
अदालत की सहमति के बाद लंबे समय से जारी वैवाहिक मुकदमे का अंत हो गया है। औपचारिक आदेश में समझौते और विवाह-विच्छेद से संबंधित अंतिम शर्तें दर्ज की जाएंगी।